पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही एक पोस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस बीच इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर जो मेन्यू वायरल किया जा रहा है, वह पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया है कि कोलकाता नगर निगम (केएमसी) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त स्कूलों में पका हुआ मिड-डे मील उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इस्कॉन को दी जाएगी। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक डेली मेन्यू चार्ट तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें भोजन की सूची दिखाई गई थी।
इस वायरल पोस्ट पर इसकॉन के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारामन दास ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए लोगों को चेतावनी दी कि इस तरह की पोस्टों से गुमराह न हों। उन्होंने ऐसे भ्रामक पोस्टों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, ताकि लोग समझ सकें कि ये पूरी तरह गलत जानकारी है।
राधारामन दास ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो मिड-डे मील मेन्यू दिखाया जा रहा है, वह इस्कॉन द्वारा जारी नहीं किया गया है और न ही इसे अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा, “मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ लोग कोलकाता के मिड-डे मील के लिए एक प्रस्तावित मेन्यू साझा कर रहे हैं। लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऐसा कोई मेन्यू फाइनल नहीं किया गया है और यह सूची हमारी तरफ से जारी नहीं हुई है।”
उन्होंने कहा कि जब भी मेन्यू को अंतिम रूप दिया जाएगा, इसकॉन इसकी आधिकारिक घोषणा करेगा। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गलत और अपुष्ट जानकारी को आगे न फैलाएं। राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने 22 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए यह घोषणा की थी कि केएमसी क्षेत्र के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पका हुआ मिड-डे मील देने का काम इसकॉन को सौंपा जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को पौष्टिक और अच्छा भोजन मिले। समझौते के अनुसार, राज्य सरकार इसकॉन को नाममात्र राशि देगी, जबकि बाकी खर्च संस्था खुद वहन करेगी।


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