June 25, 2026
National

ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी और नकली कृषि उत्पाद बेचने के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

The EOW has filed a charge sheet against two accused in a case involving fraud and the sale of spurious agricultural products.

जम्मू-कश्मीर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और नकली कृषि उत्पाद बेचने के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि आरोपियों ने बागवानों, बागवानी करने वालों और कंपनी को नुकसान पहुंचाकर गलत तरीके से आर्थिक लाभ कमाया था।

कश्मीर में नकली ‘ग्लो पोटाश’ कृषि उत्पादों के कथित वितरण के बारे में पुलिस को शिकायत दी गई थी। इस पर कार्रवाई करते हुए मामला ईओडब्ल्यू को सौंपा गया था। अपनी जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने सोपोर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

आरोपियों में सोपोर का रहने वाला शाहबाज अहमद भट और पुलवामा के राजपोरा का रहने वाला खुर्शीद अहमद मीर शामिल है। दोनों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और नकली कृषि उत्पाद बेचने के आरोप हैं।

इससे पहले, जम्मू-कश्मीर एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सरकारी फंड के गबन के मामले में एक पूर्व ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ), एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और पांच अन्य लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। एसीबी के अनुसार, इन पर कुपवाड़ा जिले के लोलाब/लालपोरा ब्लॉक में विकास कार्यों के लिए मिले सरकारी फंड में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और गबन में शामिल होने का आरोप है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, एसीबी जम्मू-कश्मीर ने बारामूला के एंटी-करप्शन स्पेशल जज की अदालत में एफआईआर के तहत छह सरकारी कर्मचारियों और एक ठेकेदार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।”

यह मामला कुपवाड़ा के लोलाब ब्लॉक में ग्रामीण विकास विभाग के जरिए किए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत से शुरू हुआ था। एंटी-करप्शन ब्यूरो की जांच में ‘मार्गी डाइवर (करिवां) फेज-1 में सरबंद का निर्माण’ और ‘डाइवर-बी में मछली पालन तालाब का निर्माण’ जैसे कार्यों को पूरा करने में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं।

एसीबी ने बताया कि जांच में गलत माप, ऐसे काम के लिए बिल बनाना जो हुआ ही नहीं, जरूरी इजाजत के बिना वन भूमि पर काम करना और खराब या घटिया काम के लिए पेमेंट जारी करने जैसी बातें सामने आईं। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने धोखाधड़ी से काम पूरा करने, गलत रिकॉर्ड बनाने, माप बढ़ाकर दिखाने और सरकारी फंड को बिना इजाजत जारी करने में मदद की।

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