June 26, 2026
National

राम मंदिर चढ़ावा विवाद : चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद विपक्षी नेताओं ने उठाए सवाल

Ram Mandir offering controversy: Opposition leaders raise questions following the resignations of Champat Rai and Anil Mishra.

26 जून । श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने केंद्र और ट्रस्ट पर तीखे सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा, “चंपत राय के इस्तीफे से क्या हासिल होगा? एक एसआईटी बनाई गई थी और उसने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। उन्होंने कुछ छोटे-मोटे लोगों को गिरफ्तार किया लेकिन पूरे ट्रस्ट को ही भंग कर देना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “सपा प्रमुख व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सबसे पहले ये मुद्दा उठाया तब जाकर ये मामला उजागर हुआ।”

वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से यह मामला खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “अगर सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपए की लूट हुई है, तो क्या पूरा पैसा सिर्फ चंपत राय के पास गया? यह बहुत बड़ा मामला है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।”

राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का ट्रस्ट से इस्तीफा देना बेहद गंभीर मामला है। अभी तो केवल एफआईआर दर्ज हुई है और कुछ लोग इस मामले की ‘मुख्य मछली’ को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस मामले के बड़े लोगों तक जांच पहुंची, तो कई प्रभावशाली नाम सामने आ सकते हैं। शक्ति यादव ने कहा, “भगवान श्रीराम के नाम पर भी राजनीति और चंदे का खेल खेला गया। इन लोगों का धर्म और कर्म से कोई मतलब नहीं है। इनका एक ही काम है, ‘चंदा खाओ और चंदा खिलाओ’।”

राम मंदिर में फंड गड़बड़ी का मामला सामने आने के कुछ दिनों बाद ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के सूत्रों के अनुसार, दोनों ने नैतिक आधार पर अपने पद छोड़े हैं। बताया जा रहा है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सैकड़ों करोड़ रुपए में धांधली का मामला सामने आया है। आरोप है कि राम मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इसे अंजाम दिया गया।

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