July 3, 2026
Punjab

पंजाब ने जेलों में स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम के साथ सहयोग को और किया सुदृढ़

Punjab reiterates its commitment to strengthen health and rehabilitation services in prisons, further strengthens cooperation with the United Nations Office on Drugs and Crime

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 27 जून | जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने शुक्रवार को लुधियाना में ‘नशा, एचआईवी और जेलों में कैदियों का स्वास्थ्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। यह कार्यक्रम यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) द्वारा पंजाब जेल विभाग तथा गैर-सरकारी संस्था ‘टर्न योर कंसर्न इंटू एक्शन’ (टीवाईसीआईए) के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।

एक दिवसीय बैठक में राज्य सरकार, जेल विभाग तथा पंजाब सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान जेलों में कैदियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “हमारे प्रमुख कदमों में से एक नशे की लत को अपराध की श्रेणी से अलग मानना है। मरीज और तस्कर में स्पष्ट अंतर है। पिछले एक वर्ष और तीन महीनों में 10,000 से अधिक नशा पीड़ितों, जिन्हें अन्यथा जेल में होना पड़ता, को नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है। हमने 25,000 कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी तथा नशे से संबंधित जांच भी करवाई है। हमारा मानना है कि जेलें केवल सुधार गृह नहीं, बल्कि उपचार, पुनर्वास और स्वस्थ जीवन की ओर वापसी के केंद्र भी होनी चाहिए। पंजाब की जेलों में पहले से ही ओओएटी क्लीनिकों का नेटवर्क कार्यरत है, जो कैदियों को नशे से उबरने में सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त कौशल विकास के लिए आईटीआई पाठ्यक्रम, मनोचिकित्सक और काउंसलर भी उपलब्ध हैं।”

राज्यभर के जेल अधिकारियों को संबोधित करते हुए जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा, “नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषसिद्धि के मामलों में पंजाब देश में अग्रणी है। इसी प्रकार सुधारात्मक न्याय के क्षेत्र में भी हमें उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। मान सरकार के लिए समाज से नशे का खात्मा करना और प्रत्येक नशा पीड़ित तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समान रूप से महत्वपूर्ण है।”

कार्यक्रम की शुरुआत जेलों में उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा से हुई, जिसके बाद आईजी जेल एवं आईएएस अधिकारी मुहम्मद तैयब ने विशेष प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान जेलों की विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान पर कई सत्र आयोजित किए गए, जिनमें नशा एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम, महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं, दिव्यांगता, नशा तथा जेलों में कैदियों के जीवन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

यूएनओडीसी के विशेषज्ञों ने जेल स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है तथा जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी कैदियों को उपचार एवं मनोसामाजिक सहायता निरंतर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

इस अवसर पर दक्षिण एशिया के लिए यूएनओडीसी क्षेत्रीय कार्यालय की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने कहा, “इस वर्ष की थीम ‘वर्ल्ड ड्रग प्रॉब्लम: पर्सिस्टिंग इश्यूज़, न्यू चैलेंजेज़, इनोवेटिव रिस्पॉन्सेज़’ हमें याद दिलाती है कि चुनौतियां बदल रही हैं, इसलिए हमारे समाधान भी समय के साथ विकसित होने चाहिए। आज का दिन केवल नशे के प्रभाव को स्वीकार करने का नहीं, बल्कि समाधान, साझेदारी और आशा को प्रोत्साहित करने का भी है। जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य, नशा उपचार और एचआईवी सेवाओं को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो लोगों के पुनर्वास और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापन के साथ-साथ सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देता है।”

बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने स्क्रीनिंग प्रणाली, नशा छोड़ने के दौरान उपचार, ओपिओइड आधारित उपचार, मानसिक एवं सामाजिक सहयोग तथा उपचार की निरंतरता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। जागरूकता और साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए नशा और एचआईवी पर आधारित शैक्षणिक उपकरण भी प्रस्तुत किए गए।

बैठक में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा नशे से प्रभावित महिलाओं को जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी निरंतर उपचार एवं देखभाल उपलब्ध कराने पर विशेष चर्चा की गई।

अंत में सभी विभागों ने मिलकर कार्य करने तथा जेलों में नशे की समस्या से निपटने के लिए मानवाधिकार आधारित, समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का संकल्प लिया।

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