पंजाब कला भवन स्थित रंधावा सभागार रविवार को “रूमी मीट्स कबीर – ए महफिल ऑफ मिस्टिक पोएट्री, दास्तानगोई एंड म्यूजिक” कार्यक्रम के लिए खचाखच भरा हुआ था, जिसका आयोजन चंडीगढ़ सिटिजन्स फाउंडेशन (सीसीएफ), सिफत और पंजाब आर्ट्स काउंसिल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
यह कार्यक्रम विद्वान प्रोफेसर मलविंदरजीत सिंह वराइच की स्मृति को समर्पित था। दास्तांगो अश्विन “अफराद” ने 13 वीं शताब्दी के फारसी कवि जलालुद्दीन रूमी और 15 वीं शताब्दी के भारतीय कवि संत कबीर की कविताओं को मिलाकर एक कथा प्रस्तुत की । गायिका सवानी शिखारे ने कथा के साथ प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति में दोनों कवियों की रचनाओं में व्यक्त आत्म-साक्षात्कार, वैराग्य और ईश्वर की खोज जैसे विषयों को शामिल किया गया। इसमें कबीर की सांसारिक आसक्ति की अनित्यता पर लिखी कविताएँ और रूमी की ईश्वर को बाह्य स्थानों के बजाय भीतर खोजने पर लिखी कविताएँ शामिल थीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ नाटककार मोहन राकेश पर आधारित लघु फिल्म “मावली” के प्रदर्शन से हुआ। आयोजकों ने कहा कि यह आयोजन भारत की साहित्यिक और कलात्मक परंपराओं के माध्यम से सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयास का एक हिस्सा था।


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