प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन की अध्यक्षता में गुरुवार को हरौली स्थित जल भवन में ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, शिमला और मंडी क्षेत्रों के जल शक्ति विभाग के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल संरक्षण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित कार्यप्रणाली, जल गुणवत्ता, सीवरेज योजनाओं का संचालन, बाढ़ नियंत्रण और निगरानी प्रणाली तथा जनभागीदारी सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
प्रधान सचिव ने बताया कि यह वार्ता उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के निर्देशों के तहत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित की जा रही बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा कि उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि अधिकारियों को जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए और उनकी जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनानी चाहिए।
जैन ने कहा कि लाभार्थियों की भागीदारी के साथ कार्यों को समय पर और प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जमीनी स्तर पर निगरानी, पारदर्शी कार्यप्रणाली और जवाबदेही महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “जनता की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाना चाहिए और किसी भी देरी की स्थिति में प्रभावित लोगों को सूचित किया जाना चाहिए।”
जैन ने संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में विभाग की संपत्तियों, जिनमें भूमि, भवन, मशीनरी, औजार और गोदामों में रखी सामग्री शामिल हैं, का संसाधन मानचित्रण करने और इन संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के लिए डिजिटल रिकॉर्ड बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यों में जनभागीदारी इन योजनाओं की सफलता की कुंजी है और अधिकारियों को जन प्रतिनिधियों के विचारों और मांगों को महत्व देने का निर्देश दिया।
प्रधान सचिव ने कार्यकारी इंजीनियरों को 5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कार्यों वाले स्थलों पर अचानक निरीक्षण करने का निर्देश दिया और सहायक इंजीनियरों को 2 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कार्यों के लिए भी ऐसा ही करने को कहा। उन्होंने कहा कि निरीक्षण कम से कम महीने में एक बार किया जाना चाहिए और रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजी जानी चाहिए। उन्होंने अवैध खनन के कारण पेयजल और सिंचाई योजनाओं को होने वाले नुकसान के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने अधिकारियों को मानसून के दौरान बाढ़ जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारी मशीनरी तैयार रखने और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया। उन्होंने जल संरक्षण के लिए गांवों में तालाब बनाने और उनकी देखभाल करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार से 250 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया।
इस अवसर पर पंचायती राज संस्थाओं और जल उपयोगकर्ता समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विभाग की योजनाओं को सुदृढ़ करने के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए। मुख्य अभियंता (परियोजनाएं) धर्मिंदर गिल, मुख्य अभियंता (जल शक्ति) अंजू शर्मा और ऊना के उपायुक्त जतिन लाल बैठक में उपस्थित थे।


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