July 9, 2026
National

अमित शाह घुसपैठ के मुद्दे पर सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों की उच्च-स्तरीय बैठक की करेंगे अध्यक्षता

Amit Shah will chair a high-level meeting of Superintendents of Police from border districts regarding the issue of infiltration.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को नई दिल्ली में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की एक कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करेंगे। इसमें घुसपैठ, अवैध आप्रवासन, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, सीमा सुरक्षा, ड्रोन से खतरा और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

यह बैठक अवैध आप्रवासन के खिलाफ केंद्र के तेज अभियान के बीच अहम है। केंद्र ने इसे बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित जिलों की जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफी) को बदलने की एक संगठित कोशिश का हिस्सा बताया है।

इस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों सहित सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस अधीक्षक शामिल होंगे। वे जमीनी हालात की जानकारी देंगे, सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों पर बात करेंगे और इन चुनौतियों से असरदार ढंग से निपटने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

यह कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हो रही है, जब केंद्र ने कुछ महीने पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे डेमोग्राफी बदलावों की जांच करने और इसके लिए जिम्मेदार कारणों का पता लगाने के लिए एक हाईलेवल कमेटी बनाई थी। कमेटी को अवैध आप्रवासन, आबादी के बसने के असामान्य पैटर्न, संगठित पलायन और धार्मिक व सामाजिक समुदायों के बीच आबादी में संरचनात्मक बदलाव जैसे मुद्दों का अध्ययन करने का काम सौंपा गया है।

पिछले कुछ महीनों में अमित शाह ने कई सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया है और जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए जिला मजिस्ट्रेटों व पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठकें की हैं। इन मुलाकातों के दौरान उन्होंने जिला प्रशासन को अवैध आप्रवासन के पैटर्न पर बारीकी से नजर रखने और सीमावर्ती इलाकों में आबादी में बदलाव पर इसके असर का आकलन करने का निर्देश दिया है।

गृह मंत्री ने अधिकारियों को सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माणों की पहचान करने और उन्हें गिराने का भी निर्देश दिया है। माना जाता है कि ऐसी जगहों का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने के केंद्रों या अवैध आप्रवासियों के लिए अस्थायी ठिकाने के तौर पर किया जाता है, इससे पहले कि उन्हें दलालों के संगठित नेटवर्क के जरिए जाली पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।

अवैध आप्रवासन से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के अलावा, इस कॉन्फ्रेंस में सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों के विकास और कल्याण पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इन जिलों को दुश्मन की गतिविधियों और सीमा पार से घुसपैठ के खिलाफ सुरक्षा की पहली पंक्ति के तौर पर रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

इसमें शामिल लोग ड्रोन से बढ़ते खतरे की भी समीक्षा कर सकते हैं, खासकर उन ड्रोनों की जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान से सीमा पार हथियार और नशीले पदार्थ लाने के लिए किए जाने का आरोप है। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम की प्रगति, खासकर पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में, इस उच्च-स्तरीय बैठक के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल होने की उम्मीद है।

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