July 9, 2026
National

राजस्थान: कोर्ट रूम छोड़कर सड़कों पर निकले जज, सड़क सुरक्षा के लिए की लग्जरी बसों की जांच

Rajasthan: Judges take to streets leaving court room, checking luxury seats for road safety

9 जुलाई । राजस्थान में सड़क सुरक्षा के लिए न्यायिक अधिकारी गुरुवार को कोर्टरूम से बाहर सड़कों पर उतरे। उन्होंने बसों में आग लगने की घटनाओं और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर खुद लग्जरी बसों और स्कूल ट्रांसपोर्ट वाहनों की जांच की।

अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को 9 बसें जब्त की गईं। गुरुवार को भी और बसें जब्त की जाएंगी। हालांकि, इन बसों में यात्रा कर रहे यात्रियों का ध्यान रखते हुए यह निश्चित किया जाएगा कि उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाया जाए। अधिकारियों ने कहा कि जब्त की गई बस को अधिकारियों के सुझाव के अनुसार पुलिस स्टेशन भेजा जाएगा, या फिर उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा।

जयपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन कुमार जीनवाल ने आईएएनएस को बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने बसों में आग लगने की बार-बार हो रही घटनाओं को बहुत गंभीरता से लिया है, खासकर फलोदी और दौसा में हुए जानलेवा हादसों के बाद, जिनमें बेगुनाह यात्री जलकर मर गए थे।

उन्होंने कहा, “हमने पाया कि कई स्लीपर लग्जरी बसें सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। जरूरी चार इमरजेंसी एग्जिट के बजाय, अधिकतर बसों में सिर्फ एक ही एग्जिट था। ऑपरेटर तय मानकों का उल्लंघन करके अतिरिक्त सामान रखने की जगह बनाने के लिए सीटों के बीच की दूरी में भी छेड़छाड़ कर रहे थे। कई मामलों में बस की असली बॉडी में भी बदलाव किया गया था। हम यह निश्चित कर रहे हैं कि जमीनी स्तर पर इन सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।”

पूरे राज्य में हुई जांच में कई उल्लंघन सामने आए, जिसके चलते 9 बसें जब्त की गईं और 15 वाहनों के चालान काटे गए। जयपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (मेट्रोपॉलिटन-2) की सचिव (जज) पल्लवी शर्मा ने चोमू पुलिया और नंबर 14 बस स्टैंड पर औचक निरीक्षण किया। ऑपरेशन के दौरान, उन्होंने पाया कि मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड एक बस कथित तौर पर राजस्थान रजिस्ट्रेशन प्लेट के साथ चल रही थी, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई।

सचिव पवन कुमार जीनवाल ने बताया कि जांच में कई लग्जरी बसों में सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं। कथित तौर पर इमरजेंसी एग्जिट और खिड़कियों को अनधिकृत सीटों और स्लीपर बर्थ से ब्लॉक कर दिया गया था, जबकि कुछ बसों में अवैध रूप से केबिन बनाए गए थे, जो इमरजेंसी के समय बाहर निकलने में बाधा डाल सकते थे।

अधिकारियों ने जरूरी इमरजेंसी एग्जिट नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए बसों के डाइमेंशन को मापा और स्लीपर बर्थ के बीच की दूरी की जांच की। अभियान के तहत अधिकारियों ने सामान रखने वाले कंपार्टमेंट की भी जांच की, ताकि यह निश्चित किया जा सके कि बसों का इस्तेमाल कमर्शियल सामान ढोने के लिए नहीं किया जा रहा है।

इलाके में चल रही स्कूल बसों की भी सुरक्षा मानकों के पालन के लिए जांच की गई। जांच टीम में न्यायिक अधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी और ट्रैफिक पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने कार्रवाई करने से पहले संयुक्त रूप से वाहनों के दस्तावेजों और सुरक्षा सुविधाओं की जांच की।

राज्य में हाल ही में हुई बस दुर्घटनाओं और आग लगने की घटनाओं के बाद राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) ने यह विशेष अभियान शुरू किया है। अगले महीने के दौरान न्यायिक अधिकारी जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर, अजमेर, श्रीगंगानगर, अलवर, भीलवाड़ा, राजसमंद और सीकर सहित प्रमुख अंतर-राज्यीय परिवहन केंद्रों पर इसी तरह की जांच करेंगे।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री के अनुसार, अभियान का पहला चरण लंबी दूरी की लग्जरी बसों पर केंद्रित है। पूरे राजस्थान में बेहतर जवाबदेही और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर जुर्माना और वाहन जब्त करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।

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