स्वास्थ्य सेवा निदेशक (डीएचएस) द्वारा की गई एक जांच में रोहतक सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन परीक्षण और प्रतिपूर्ति के लिए फर्जी बिल तैयार करने से संबंधित एक घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत किए गए सीटी स्कैन के लिए 1,050 से अधिक फर्जी प्रतिपूर्ति बिल जमा किए गए थे। 800 रुपये से लेकर 3,400 रुपये तक के ये बिल अक्टूबर 2024 से मई 2025 के बीच बनाए गए थे। इस घोटाले की अनुमानित राशि 1 करोड़ रुपये से अधिक है। सूत्रों ने बताया कि सही रकम का पता लगाने के लिए आगे की जांच की सिफारिश की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, “1,220 मरीजों पर किए गए स्कैन टेस्ट के लिए 1.25 करोड़ रुपये से अधिक के रीइम्बर्समेंट क्लेम किए गए थे। हालांकि, इनमें से केवल 131 मरीजों के बिल ही असली पाए गए। बीपीएल परिवारों, आयुष्मान भारत कार्डधारकों और सरकारी कर्मचारियों जैसी श्रेणियों के लाभार्थियों को सीटी स्कैन सेवाएं मुफ्त में प्रदान की जाती हैं। सीटी स्कैन सुविधा संचालित करने वाली निजी एजेंसी ने स्वास्थ्य विभाग को ये क्लेम जमा किए थे।”
जांच रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए, डीएसएच डॉ. अनिल बिरला ने कहा कि इसे उच्च अधिकारियों को कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, “सिविल अस्पताल के अधिकारियों की संलिप्तता भी संदिग्ध है। हमने राज्य के खजाने को हुए वित्तीय नुकसान का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए तीन सदस्यीय समिति द्वारा जांच की सिफारिश की है।”
सीटी स्कैन सेवाओं के बिल में बड़े पैमाने पर हेराफेरी के आरोप में मुख्यमंत्री को सौंपी गई शिकायत के बाद अनियमितताएं सामने आईं। शिकायत में स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत में कुछ अधिकारियों के नाम भी शामिल थे।


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