July 14, 2026
National

सर्वोच्च अदालत ने हमेशा देश में भाईचारे का माहौल पैदा किया : अवधेश प्रसाद

The Supreme Court has always fostered an atmosphere of brotherhood in the country: Awadhesh Prasad

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर चढ़ावा मामले में दाखिल याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है। इसके इतर, एसआईटी की जांच के संबंध में दाखिल रिपोर्ट भी तलब की है और ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया है। इस पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह बहुत ही अच्छा कदम है। सुप्रीम कोर्ट का गरिमामय इतिहास रहा है। देश में तमाम क्षण आए, जब संविधान पर संकट उत्पन्न हुआ लेकिन शीर्ष अदालत ने हमेशा निष्पक्षता बनाए रखी।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में अनेकता में एकता के सूत्र के जरिए लोगों को बांधने की कोशिश की गई है, उसे भाजपा ने तोड़ने की कोशिश की। संविधान पर कई बार हमला करने की कोशिश की गई। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से अनेकता में एकता के सूत्र को बांधने की कोशिश की गई। सुप्रीम कोर्ट की पहल से ही देश में भाईचारे का माहौल पैदा हुआ है। हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी का विवाद बड़ा मुद्दा है और यह लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले का संज्ञान ले लिया है। मुझे पूरा भरोसा है कि हर निर्णय राष्ट्रीय हित में लिया जाएगा। मुझे पूरा भरोसा है कि कोर्ट की ओर से जो भी निर्णय लिया जाएगा, लोगों के हित में होगा।

इसके अलावा, उन्होंने ट्रस्ट की 22 तारीख को होने वाली बैठक पर उन्होंने कहा, हमें इस बैठक से कोई लेनादेना नहीं है। ट्रस्ट से क्या ही उम्मीद की जाए। इस ट्रस्ट में शामिल लोगों पर ही अंगुलियां उठ रही हैं। अब इनकी बैठक का कोई मतलब नहीं रह जाता है। अब ऐसी स्थिति में इनकी बैठक का कोई मतलब नहीं रह जाता है। ट्रस्ट को भंग कर दिया जाना चाहिए और इसमें शामिल लोगों को मंदिर के बाहर खड़ा किया जाना चाहिए। ऐसे लोगों को राम मंदिर के संदर्भ में कुछ भी कहने का कोई नैतिक हक नहीं है।

राम मंदिर निर्माण के लिए संयुक्त कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद के लिए आवेदन भी दिए गए हैं, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो इसे विचाराधीन कहना ज्यादा मुनासिब रहेगा। पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है, तो ऐसे में किसी भी प्रकार की अग्रिम कार्रवाई किसी भी मामले में उचित नहीं है। ना ही इसमें कोई वैधानिकता है।

उधर, अवधेश प्रसाद ने साफ किया कि मैं राम मंदिर के जांच को लेकर गठित एसआईटी की जांच से किसी भी सूरत में संतुष्ट नहीं हूं। हमारे संतोष का सवाल नहीं है। यह असंख्य लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है। लिहाजा यह कोशिश होनी चाहिए कि इनकी भावनाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए।

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