अवैध खनन मामले में एक प्रमुख व्यवसायी के कार्यालय से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आयकर अधिकारियों को तलब किया है। अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है और मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी है। एजेंसी ने आज सुबह छापेमारी रद्द कर दी।
इस क्षेत्र में खनन माफिया अनिवार्य पर्यावरण मंजूरी के बिना ही काम कर रहा है, जिससे पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। खनन की मंजूरी देने से पहले हितधारकों की सार्वजनिक सुनवाई अनिवार्य है। यह मंजूरी केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा बड़ी परियोजनाओं के लिए और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) द्वारा छोटी परियोजनाओं के लिए दी जाती है। अधिकारियों की कथित तौर पर अनदेखी करते हुए वर्षों से अवैध खनन जारी है। एक अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश से कई नदियां और छोटी नदियां आकर यहां बसती हैं, जिसके चलते कम निवेश और अधिक लाभ के कारण कई बेरोजगार निवासी खनन व्यवसाय में आ गए हैं।
उन्होंने कहा, “रेत, पत्थर और बजरी की भारी वित्तीय आय और उच्च मांग का मतलब था कि पठानकोट जिले में निम्न-मध्यम वर्ग के लोग भी बड़ी संख्या में इस व्यापार में शामिल हो गए।”
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। ईडी की कार्रवाई तेज होने के बाद कई व्यापारी शहर छोड़कर चले गए हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनेता भी जांच के दायरे में हैं। ईडी ने 2023 के पंजाब सतर्कता ब्यूरो के एक मामले की जांच शुरू कर दी है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित पंचायत की लगभग 92 एकड़ जमीन को धोखाधड़ी से निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित करने से संबंधित है, जिससे बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन को बढ़ावा मिला।


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