July 21, 2026
National

कोयंबटूर में इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित होगा चाडिवायल हाथी शिविर

Chadivayal Elephant Camp in Coimbatore to be developed as an eco-tourism center.

तमिलनाडु का वन विभाग कोयंबटूर जिले के सिरुवानी की तलहटी में स्थित नव विकसित चाडिवायल हाथी शिविर को पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी कर रहा है। विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके मंजूर होने पर पर्यटक नियंत्रित वातावरण में प्रशिक्षित हाथियों को भोजन करते और स्नान करते हुए देख सकेंगे।

वन विभाग का मानना है कि यह शिविर कोयंबटूर जिले में एक प्रमुख इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित होगा और लोगों को हाथियों के संरक्षण तथा मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन के बारे में जागरूक करने में भी मदद करेगा।

यह शिविर लोकप्रिय कोवाई कुट्रालम जलप्रपात के रास्ते में स्थित है। वन अधिकारियों के अनुसार, सप्ताहांत में लगभग 2,000 और सप्ताह के अन्य दिनों में करीब 500 पर्यटक कोवाई कुट्रालम पहुंचते हैं। ऐसे में हाथी शिविर खुलने से क्षेत्र में पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस आधुनिक हाथी पुनर्वास एवं संघर्ष प्रबंधन केंद्र का उद्घाटन पूर्व उपमुख्यमंत्री उधयनिधि स्टालिन ने किया था। शिविर में एक साथ 18 हाथियों को रखने की क्षमता है। यहां हाथियों के लिए शेड, महावतों के आवास, स्नान स्थल, प्राकृतिक तालाब, प्रशिक्षण के लिए क्राल (बाड़ा) तथा विशेष आहार तैयार करने के लिए रसोई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

वन अधिकारी पर्यटकों के लिए ऐसा समय निर्धारित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे हाथियों की दिनचर्या और उनके कल्याण पर कोई असर न पड़े। वर्तमान में हाथियों को सुबह करीब 8:30 बजे और शाम 5:30 बजे भोजन कराया जाता है, जबकि कोवाई कुट्रालम का समय सुबह 10 बजे से शाम 4:30 बजे तक है। इसलिए अधिकारियों द्वारा दर्शकों के लिए उपयुक्त समय तय करने पर चर्चा की जा रही है।

अनामलाई टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर डी. वेंकटेशन ने बताया कि वन अधिकारी और पशु चिकित्सक नियंत्रित तरीके से पर्यटकों के प्रवेश की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। यह व्यवस्था थेप्पाकाडु हाथी शिविर (मुदुमलाई) और कोझिकामुथी हाथी शिविर (अनामलाई टाइगर रिजर्व) की तर्ज पर होगी, जहां निर्धारित समय में पर्यटकों को हाथियों को देखने की अनुमति दी जाती है।

फिलहाल चाडिवायल हाथी शिविर में चार हाथी हैं। इनमें 24 वर्षीय नर हाथी ‘मुथु’ प्रमुख है, जिसे कोझिकामुथी हाथी शिविर से लाया गया है। यह वही हाथी है जो पहले पोलाची क्षेत्र में भोजन की तलाश में बार-बार आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाता था और ‘अरिसी राजा’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया था। पुनर्वास के बाद अब उसे कुमकी हाथी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में वह कोयंबटूर जिले में जंगली हाथियों को खेतों और रिहायशी इलाकों से दूर भगाने के अभियान में मदद कर सके।

शिविर में 17 वर्षीय मादा हाथी ‘कावेरी’ भी है, जिसे देखभाल के लिए यहां लाया गया है। उसे मानव-हाथी संघर्ष से जुड़े अभियानों में शामिल नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा 35 वर्षीय नर हाथी ‘जॉन’, जिसे थेप्पाकाडु से लाया गया है, पहले भी कोयंबटूर के वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा चुका है। वहीं ‘सुमंगला’, जिसे वर्ष 1988 में अनाथ अवस्था में बचाया गया था, पैर की चोट से उबरने के बाद मुदुमलाई से यहां स्थानांतरित की गई है।

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