July 22, 2026
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भारत-चीन रिश्तों में सकारात्मक प्रगति, मनीला में जयशंकर ने वांग यी से की व्यापक बातचीत

Positive progress in India-China relations; Jaishankar holds comprehensive talks with Wang Yi in Manila.

 

मनीला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ व्यापक बातचीत की। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री ने कहा, “भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़े हैं।” दोनों ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति एवं स्थिरता के साथ ही प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की।

 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) और आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) की बैठक के इतर चीन के विदेश मंत्री एवं चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी के साथ विस्तृत बातचीत की।

बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, “आपसे फिर मिलकर खुशी हुई। ईएएस और आसियान क्षेत्रीय मंच में हमारी भागीदारी न केवल सामूहिक रूप से विचारों के आदान-प्रदान का अवसर देती है, बल्कि इस द्विपक्षीय बैठक का भी अवसर प्रदान करती है।”

उन्होंने कहा कि यह बैठक भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “हम एक वर्ष पहले मिले थे और आप हाल ही में भारत भी आए थे। आज की यह बैठक हमारे संबंधों का आकलन करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श के लिए उपयोगी होगी।”

विदेश मंत्री ने कहा कि अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अक्टूबर 2024 में कजान में हमारे नेताओं की बैठक के बाद भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़े हैं। पिछले अगस्त में तियानजिन में उनकी मुलाकात ने इस दिशा को और मजबूत किया।”

जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर संबंध आपसी सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के सम्मान पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए अनिवार्य शर्त है।

उन्होंने कहा, “सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की पूर्वशर्त है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस पर आगे भी निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।”

जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेद विवाद का रूप न लें। इन्हें उचित ढंग से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।”

विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का स्वागत किया। उन्होंने प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली, वीजा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा के दोबारा शुरू होने और सीमा व्यापार की बहाली जैसे कदमों का उल्लेख किया।

हालांकि उन्होंने कहा कि अभी भी कई मुद्दों पर काम किया जाना बाकी है। इनमें भारतीय कंपनियों के लिए निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चिंताएं तथा सरकारी और जन-स्तर पर संपर्क को और सुगम बनाना शामिल है।

जयशंकर ने ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता के दौरान चीन द्वारा दिए गए सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व के प्रमुख मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।

 

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