शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने आज रोपड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार से प्रवेश परीक्षाओं के केंद्रीकरण को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रणाली पेपर लीक और भर्ती घोटालों के प्रति संवेदनशील हो गई है, जिससे छात्रों को अत्यधिक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
चीमा ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार होने वाली प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं ने उन मेधावी उम्मीदवारों का आत्मविश्वास चकनाचूर कर दिया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों व्यतीत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवादों के कारण छात्रों में चिंता, अवसाद और कुछ मामलों में आत्महत्या तक की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
इस मुद्दे को राष्ट्रीय चिंता का विषय बताते हुए चीमा ने कहा कि केंद्र को केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले संस्थानों के लिए प्रवेश परीक्षाएं संबंधित राज्यों द्वारा ही आयोजित की जानी चाहिए, जैसा कि पहले होता था, जबकि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय संस्थानों की परीक्षाओं तक ही सीमित रहना चाहिए। चीमा दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों पर एसएडी की प्रतिक्रिया जानने के लिए मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक केंद्रीकरण से न केवल प्रशासनिक कमजोरियां बढ़ती हैं बल्कि संविधान में परिकल्पित संघीय ढांचा भी कमजोर होता है। उन्होंने आगे कहा कि राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने का अधिकार देने से जवाबदेही में सुधार होगा और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की संभावना कम होगी।
पंजाब में NEET परीक्षा के पेपर लीक और भर्ती विवादों का जिक्र करते हुए चीमा ने कहा कि बार-बार होने वाले परीक्षा घोटालों ने योग्य युवाओं का भर्ती प्रणाली पर भरोसा कम कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में पंजाब में फार्मेसी अधिकारियों, नायब तहसीलदारों और उत्पाद शुल्क एवं कराधान निरीक्षकों सहित कई भर्ती प्रक्रियाएं संदेह के घेरे में आ गई हैं।
एसएडी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में गैर-पंजाबी लोगों की भर्ती और प्रमुख प्रशासनिक पदों पर बाहरी लोगों की नियुक्ति पंजाब के युवाओं को रोजगार के अवसरों से वंचित कर रही है।
मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए चीमा ने मांग की कि हर पेपर लीक और भर्ती घोटाले के लिए जवाबदेही तय की जाए, और जोर देकर कहा कि अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसे पद की परवाह किए बिना बख्शा नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने भगवंत मान सरकार की कर्मचारी मुद्दों, लंबित बाढ़ मुआवजे, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और राज्य की वित्तीय स्थिति से निपटने के तरीके की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले की गई कई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रही है।


Leave feedback about this