उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य भर में आवश्यक पेयजल और सिंचाई सेवाओं को मजबूत करने के लिए चालू वित्त वर्ष में जल शक्ति विभाग के लगभग 4,000 रिक्त पदों को भरा जाएगा। उन्होंने ऊना जिले के हरौली विधानसभा क्षेत्र के पलकवाह गांव में पेयजल और सिंचाई योजनाओं के संचालन, रखरखाव और जल गुणवत्ता निगरानी पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित किया। अग्निहोत्री ने कहा कि इन सेवाओं की कुशल डिलीवरी सुनिश्चित करने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नव नियुक्त पैरा पंप ऑपरेटर, पैरा फिटर, बहुउद्देशीय कर्मचारी और जल रक्षक विभाग के ध्वजवाहक हैं और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति तथा सिंचाई अवसंरचना के रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उन्हें सुरक्षित भविष्य और अपने कार्यकाल के दौरान उनके कल्याण के लिए सरकार द्वारा उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
उपमुख्यमंत्री ने राज्य में पेयजल की गुणवत्ता में सुधार और जल शोधन प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई 2,000 करोड़ रुपये की योजना की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और जलजनित रोगों की घटनाओं को कम करने के लिए उन्नत तकनीक पर आधारित शोधन प्रणालियां स्थापित की जाएंगी।
अग्निहोत्री ने बताया कि कांगड़ा जिले में फ़िना सिंह सिंचाई परियोजना को पूरा करने के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नशाखोरी से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और नशाखोरी से जुड़े मामलों में शामिल 36 सरकारी कर्मचारियों को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त बनाने में जनता की अधिक भागीदारी का आह्वान किया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों को उनकी अनुकरणीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया। मुख्य अभियंता रोहित दुबे, अधीक्षण अभियंता (हमीरपुर) विकास कपूर, कार्यकारी अभियंता ललिता, अधीक्षण अभियंता (ऊना) नरेश धीमान और कार्यकारी अभियंता पुनीत शर्मा उपस्थित थे।


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