July 30, 2026
National

छात्रों से संवाद नहीं, बल का प्रयोग किया, सरकार ने जवाबदेही नहीं दिखाई: मल्लिकार्जुन खड़गे

The government used force instead of engaging in dialogue with the students and failed to demonstrate accountability: Mallikarjun Kharge.

राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय बल प्रयोग किया और पूरे मामले पर गृह मंत्री ने सदन और देश के सामने जवाबदेही नहीं दिखाई।

खड़गे ने कहा कि छात्रों और युवाओं की ताकत ही सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करेगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार की ओर से हर विषय पर कुछ चुनिंदा मंत्री ही जवाब देते हैं, जबकि जिन मंत्रियों से संबंधित विषय होता है, वे सामने नहीं आते। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की घटना के तुरंत बाद सरकार को देश के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इस पूरे मामले पर संसद या देश के सामने विस्तृत बयान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों से सीधे संवाद करने के बजाय अन्य माध्यमों से अपनी बात रखने की कोशिश की।

खड़गे ने सरकार से कई सवाल पूछते हुए कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि छात्रों लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया। आंसू गैस छोड़ने का आदेश किसने दिया, पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी, सादे कपड़ों में छात्रों की पिटाई करने वाले लोग कौन थे, दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स ने किसके निर्देश पर कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और असम सहित कई राज्यों में भी छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई हुई, लेकिन केंद्र सरकार इस पर मौन रही। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित कठोर कार्रवाई पर उसे कोई पछतावा है या नहीं। खड़गे ने पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद संसद परिसर में सत्ता पक्ष द्वारा किए गए स्वागत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह उनका स्वागत किया गया, उससे ऐसा संदेश गया मानो किसी बड़ी उपलब्धि का उत्सव मनाया जा रहा हो।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री के कार्यकाल में ऐसी गंभीर घटनाएं हुई हों तो स्वाभाविक रूप से आत्ममंथन और खेद व्यक्त किया जाना चाहिए था, न कि सार्वजनिक स्वागत। खड़गे ने कहा कि केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे से पूरी परीक्षा व्यवस्था नहीं बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और परीक्षा संचालन की व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में फिर पेपर लीक की घटनाएं होंगी और संसद में बार-बार इसी मुद्दे पर बहस करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने संशोधन विधेयक में सजा और जुर्माना बढ़ाने पर जोर दिया है, लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए आवश्यक संस्थागत और प्रशासनिक सुधारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।

खड़गे ने कहा कि सरकार को केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे पेपर लीक जैसी घटनाएं होने की संभावना ही समाप्त हो जाए। खड़गे ने कहा कि 20 जुलाई को हजारों छात्र शांतिपूर्ण मार्च और प्रदर्शन कर रहे थे। उनका उद्देश्य सरकार से संवाद करना था, लेकिन उन्हें लाठीचार्ज, आंसू गैस, पानी की बौछार, पैलेट गन और अन्य पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड लगाए गए, मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशन बंद किए गए तथा इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गईं। उनके अनुसार, इन कदमों से न केवल छात्र बल्कि आम नागरिक भी नाराज हुए। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान 100 से अधिक छात्र घायल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्रों को गंभीर चोटें आईं और कई को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ छात्रों की आंखों में पैलेट लगने से उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा।

खड़गे ने कहा कि दूर-दराज के राज्यों और ग्रामीण इलाकों से आए छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देखकर उन्हें शर्म महसूस हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन छात्रों के हाथ-पैर टूटे और जो अस्पतालों में भर्ती हुए, उसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले को ठीक ढंग से नहीं संभाला और समय रहते छात्रों से बातचीत की होती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।

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