कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा नेताओं ने निशाना साधा है। मुंबई में भाजपा नेता राम कदम ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि थरूर कांग्रेस के विद्वान और अनुभवी नेता हैं और अगर वह राहुल गांधी के प्रयासों पर सवाल उठा रहे हैं, तो इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
भाजपा नेता राम कदम ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि शशि थरूर को अक्सर एक विद्वान नेता के रूप में देखा जाता है और उनकी बुद्धिमत्ता पर कोई सवाल नहीं है। अगर थरूर यह मानते हैं कि राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर दिखावा करने की कोशिश की, लेकिन वास्तविक समस्याओं तक नहीं पहुंच पाए, तो यह कांग्रेस के भीतर भी चर्चा का विषय होना चाहिए। किसी भी वास्तविक मुद्दे को उठाने के लिए पारदर्शिता और सच्चाई जरूरी है। जनता यह आसानी से समझ लेती है कि कौन दिल से मुद्दा उठा रहा है और कौन केवल राजनीतिक दिखावा कर रहा है।
राम कदम ने राहुल गांधी के रवैये को पूरी तरह दिखावटी करार देते हुए कहा कि वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है।
एफसीआरए बिल को लेकर राम कदम ने कहा कि विदेशी अंशदान से जुड़े नियम काफी पुराने हैं और इनमें सुधार के लिए समय-समय पर प्रयास किए जाते रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई संस्था उसे मिले विदेशी फंड का 50 फीसदी हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च कर सकती है। यदि कोई संस्था प्रशासनिक खर्च के नाम पर फंड का दुरुपयोग करती है, तो खर्च की सीमा को कम किया जाना जरूरी है। प्रस्तावित बदलावों के तहत प्रशासनिक खर्च की सीमा को 50 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ट्रस्ट में फंड की हेराफेरी या गलत इस्तेमाल पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के कब्जे में जाने का प्रावधान होना चाहिए।
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने अमेरिकी टैरिफ बिल के मुद्दे पर कहा कि भारत सुरक्षित और मजबूत हाथों में है तथा देश के हित उसके नेतृत्व के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
झारखंड में छात्रों के विरोध और पेपर लीक के मुद्दे पर नकवी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी देशभर में छात्रों, युवाओं, किसानों और अर्थव्यवस्था समेत अलग-अलग मुद्दों पर अपनी सलाह देते रहते हैं। राहुल गांधी को उस राज्य में जाकर अपनी विशेषज्ञ सलाह देनी चाहिए, जहां उनकी पार्टी या सहयोगी सत्ता में हैं और जहां पेपर लीक को लेकर छात्र चिंतित हैं। राहुल गांधी को पहले अपने सहयोगियों और सहयोगी राज्यों को सलाह देनी चाहिए। यदि राहुल गांधी झारखंड जाकर पेपर लीक और छात्रों की चिंताओं के समाधान के लिए अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे उनकी गंभीरता और ईमानदारी स्पष्ट होगी।
प्रयागराज में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भी नकवी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देशभर में छात्रों, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ टिप्पणी करते हैं, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस राज्य में उनकी अपनी पार्टी सत्ता में है, वहां के मुद्दों पर वह उसी तरह की विशेषज्ञ टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।
कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार को लेकर भी नकवी ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “कैबिनेट के लिए कैश।” नकवी ने इसे “वोट के लिए कैश” की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि पहले कैश फॉर वोट की चर्चा होती थी, लेकिन अब कांग्रेस ने कैबिनेट के लिए कैश का मामला सामने रखकर अपना “कारनामा” दिखा दिया है।


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