कर्नाटक में कथित आदिवासी कल्याण घोटाले को लेकर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) (जेडीएस) ने मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने मंगलवार को ऐलान किया कि नागेंद्र को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दोनों दलों ने विधानसभा सत्र के दौरान सरकार के खिलाफ संयुक्त आंदोलन करने का भी फैसला किया है।
विधान सौध में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब तक कथित भ्रष्ट सरकार को सत्ता से बाहर नहीं किया जाता, तब तक विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। अशोक ने दावा किया, “यह कर्नाटक की भ्रष्ट सरकार है। जब तक इस भ्रष्ट सरकार को हटाया नहीं जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम मंत्री नागेंद्र को बर्खास्त किए जाने और 184 करोड़ रुपये राज्य के खजाने में वापस लाए जाने तक आंदोलन जारी रखेंगे।”
उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच और नागेंद्र के खिलाफ लगे आरोपों के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया। अशोक ने आरोप लगाया कि नागेंद्र के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में मामले हैं और चार्जशीट में भी उनका नाम शामिल है।
जेडीएस विधायक और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के बेटे एच.डी. रेवन्ना ने कहा कि भाजपा और जेडीएस ने सरकार के खिलाफ संयुक्त रूप से मोर्चा खोलने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि दोनों दल बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय करेंगे। रेवन्ना ने कहा, “हमने संयुक्त आंदोलन करने को लेकर चर्चा की है। भाजपा नेताओं ने विरोध को लेकर जो बात कही है, हम उससे सहमत हैं। हम बैठक करेंगे और सरकार का एकजुट होकर विरोध करने की रणनीति तय करेंगे।”
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने विधानसभा के मौजूदा सत्र में राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की मांग की। उन्होंने सूखा, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में कथित अनियमितताओं समेत कई मुद्दों को सदन में उठाने की बात कही। विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से विधानसभा में दोबारा बहस का इंतजार किए बिना नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।
उन्होंने कहा, “अगर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को इन मुद्दों की चिंता है तो उन्हें सदन में इन पर चर्चा करने देनी चाहिए। समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। मंत्री नागेंद्र को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाया जाना चाहिए।” विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि नागेंद्र के खिलाफ कार्रवाई से पहले विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब चर्चा और बहस के बाद नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाया गया था। ऐसे में अब इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कुछ बाकी नहीं है।
उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार से “हठ छोड़ने” और नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की अपील की। साथ ही केपीएससी, नाईस टाउनशिप और बिदादी परियोजना से जुड़े मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा की मांग की। कर्नाटक का कथित आदिवासी कल्याण घोटाला राज्य संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से करीब 89 से 94 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी से जुड़ा है। यह रकम अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए निर्धारित थी, लेकिन आरोप है कि इसे फर्जी खातों और शेल संस्थाओं के जरिए दूसरी जगह भेजा गया।
मामला मई 2024 में सामने आया था। निगम के एक लेखा अधीक्षक ने आत्महत्या कर ली थी और पीछे छोड़े गए नोट में अनधिकृत एवं अवैध फंड ट्रांसफर का उल्लेख किया गया था। इसके बाद मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया। पड़ोसी राज्यों के खातों में कथित तौर पर रकम भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जांच में सामने आया कि एक नए खोले गए बैंक खाते में कुल 187 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। इनमें से करीब 89 से 94 करोड़ रुपये कथित तौर पर बिचौलियों के जरिए व्यवस्थित तरीके से निकाले गए और अनधिकृत कार्यों में इस्तेमाल किए गए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच की और नेताओं तथा उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी ने अपनी अभियोजन शिकायत में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को कथित तौर पर मुख्य आरोपी और मामले का मास्टरमाइंड बताया है।


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