August 26, 2026
National

अहमदाबाद में ‘भारत जल विमर्श 2047’ पर जुटे जल संरक्षक, बोले- जल है तो कल है

Water conservationists gather in Ahmedabad for ‘Bharat Jal Vimarsh 2047’; declare: “If there is water, there is a future.”

गुजरात के अहमदाबाद में ‘भारत जल विमर्श 2047’ नाम से दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के जल संरक्षकों ने शिरकत की। ‘ग्रीन मैन ऑफ इंडिया’ विजय पाल बघेल ने कहा कि जल और वायु को बनाया नहीं जा सकता, सिर्फ बचाया जा सकता है, और अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो वह पानी को लेकर होगा। वहीं पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविदों ने ‘जल है तो कल है’ का संदेश देते हुए जल संचय और जागरूकता पर जोर दिया।

ग्रीन मेन ऑफ इंडिया विजय पाल बघेल ने कहा, “मैं विजयपाल बघेल, पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ के साथ पर्यावरण पर काम करता हूं। ग्रीन मेन ऑफ इंडिया के नाम से पहचान है। गुजरात की पावन भूमि पर उद्यम और सेंटर फॉर वाटर पीस दो संस्थाओं ने मिलकर एक वाटर डिसकोस के नाम से दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका मुख्य मुद्दा पानी के ऊपर चिंतन करना है, क्योंकि पानी बनाया नहीं जा सकता। जलवायु एक शब्द होता है, जो जल और वायु दो शब्दों से मिलकर बना है।”

उन्होंने कहा कि न जल बनाया जा सकता है, न वायु बनाई जा सकती है, लेकिन इसे बचाया जा सकता है। इसकी जागरूकता के लिए इस कार्यक्रम में पानी पर काम करने वाले सभी महत्वपूर्ण लोगों को यहां बुलाया गया है। जब तक पानी भू-पृष्ठ जल हुआ करता था, तब तक पानी की कोई किल्लत नहीं थी। जब से हमने बटन कल्चर का प्रयोग किया है, हमने धरती मां की कोख खाली कर दी है, सुखा दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि यही वजह है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की समस्या हो रही है। अगर तीसरा विश्व युद्ध होना है, तो पानी को लेकर होगा। जल जीवन के लिए बहुत जरूरी है। पानी और पेड़ दोनों मिले-जुले हैं। पानी होगा तो पेड़ होगा, पेड़ होगा, तो पानी होगा। पेड़ कम हो रहे हैं, हमारी सांस कम हो रही है। कोरोना महामारी के दौरान आपने देखा होगा कि इंसानों को कमरे में बंद कर दिया गया था तो प्रकृति अपने मूल स्वरूप में आ गई थी। चारों तरफ हरियाली थी।

उन्होंने आगे कहा कि आपने सेकंड वेव के टाइम पर देखा होगा कि ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हमने बहुत सारे अपने लोगों को खोया और नदियां निर्मल हुईं, अविरल हुईं। इस कार्यक्रम के जरिए पूरी दुनिया को एक मैसेज जाएगा कि पानी क्यों ज्यादा जरूरी है। हमें एक-एक बूंद पानी बचाना है और उससे ज्यादा जरूरी है कि हमें सांस बचाना है। हम जो सांस लेने वाले हैं, वो हमको कहां से मिलेगा, इसका इंतजाम करना है।

पद्मश्री से सम्मानित सेठ पाल सिंह ने कहा कि मैं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद से हूं। मैं धन्यवाद देना चाहता हूं डॉ. मोर जोशी को, जिन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में ‘भारत जल विमर्श 2047′ में पानी के ऊपर यह कार्यशाला रखी है। मेरा मैसेज यही है कि हम किस तरह से पानी को बचा सकते हैं। जल है तो कल है, जल है तो जीवन है। हमारा देश विविधता का देश है, भारत वर्ष नदियों का देश है, और यदि नदी नहीं रहेगी, पानी नहीं बचेगा, तो यह जीवन और यह सृष्टि सब कुछ इसके ऊपर निर्भर है।

उन्होंने कहा कि अंबर से जब पानी बरसे, बूंद-बूंद को क्यों हम तरसे? वो अमृत रूपी पानी जब बारिश के रूप में बरसता है, हमारे खेतों में, हमारी सड़कों में, गलियों में बह करके नालियों के माध्यम से, नदियों के माध्यम से जो हमारी उपजाऊ जमीन को काट करके ले जाता है, उसे हम कैसे बचा सकते हैं? खेतों की मेढ़ मजबूत करके कैसे बचा सकते हैं, उसमें छोटे-छोटे डैम बनाकर बचा सकते हैं। ये एक बहुत अच्छी पहल है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो आह्वान है, 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बने, तो उसी के क्रम में जल के रूप में हमारी कैसी क्या स्थिति होगी? इसके लिए ये एक बहुत अच्छा चिंतन और मंथन है।

2019 में पद्मश्री से सम्मानित भरत भूषण त्यागी ने कहा कि मैं जनपद बुलंदशहर के बीटा का रहने वाला हूं। इस कार्यक्रम में जल की नीति और कार्य योजना को लेकर एक विस्तृत चर्चा होगी। इस कार्यक्रम में पूरे देश से मनोवैज्ञानिक एकत्रित हुए हैं। जल इस समय चर्चा का मुख्य विषय है, क्योंकि प्रकृति के संरक्षण, उसके वैभव और व्यवस्था को जब हम देखते हैं, तो मिट्टी-पत्थर से लेकर सभी वनस्पतियां और सभी जीव संसार और मनुष्य के लिए पानी बहुत उपयोगी है। यदि पानी की उपयोगिता समझ में नहीं आएगी तो बार-बार संरक्षण के लिए सवाल उठता रहेगा। इस समय मानसिकता को बदलने की जरूरत है। हम प्रकृति के विरोध में आगे न बढ़ें, बल्कि संसाधनों को समझकर उसकी व्यवस्था को समझने की जरूरत है।

वकील महेश गोयल ने कहा कि मैं पिछले 18 साल से जल संरक्षण पर काम कर रहा हूं। मैंने एक किताब लिखी है, जिसकी अब तक 80,000 प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं और कई भाषाओं में अनुवाद भी हो चुकी है। इसमें लिखा है कि पानी की कमी क्यों है? मेरा एक संदेश है कि हमें केवल दो संकल्प करने है। पानी बर्बाद नहीं करेंगे, जिसके लिए हमें केवल इतना सा ध्यान रखना है कि खराब नल न हो और बेवजह न चले। दूसरा वर्षा जल संग्रहित करना है।

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