August 29, 2026
Entertainment

कभी आईएफएस अफसर बनना चाहते थे अमिताभ बच्चन, दो नंबर से पास होने का सुनाया था किस्सा

Amitabh Bachchan once aspired to become an IFS officer; he had shared an anecdote about passing by a margin of just two marks.

अमिताभ बच्चन को आज बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में गिना जाता है। दशकों से उन्होंने अपनी एक्टिंग और दमदार आवाज से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उनकी जिंदगी में भी ऐसे कई पड़ाव आए, जब उन्हें अपने करियर को लेकर अलग-अलग रास्तों के बारे में सोचना पड़ा था।

‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सीजन 18 में अमिताभ ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए पढ़ाई से जुड़ा एक मजेदार किस्सा सुनाया। इसी बातचीत में उन्होंने बताया कि एक समय उनके मन में भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में जाने का ख्याल आया था। हालांकि, यह सपना ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका।

शो में अमिताभ बच्चन कंटेस्टेंट प्रगति कल्पेकर से बात कर रहे थे। प्रगति ने अपने भविष्य के बारे में बताया कि वह आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और भारतीय विदेश सेवा में अधिकारी बनना उनका सपना है। प्रगति ने बिग बी से कहा, ”मैं आईएफएस बनना चाहती हूं क्योंकि इस नौकरी में मुझे देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।”

उन्होंने अमिताभ को बताया कि राजनयिकों को मैरून रंग का पासपोर्ट मिलता है और उस पर राजनयिक लिखा होता है। प्रगति की बात सुनकर अमिताभ को अपने कॉलेज के दिन याद आ गए और उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया।

अमिताभ ने कहा, ”मेरे पिता हरिवंश राय बच्चन चाहते थे कि मैं अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करूं। वह मुझे अक्सर समझाते थे कि जिंदगी में ग्रेजुएशन करना बहुत जरूरी है। मैंने साइंस सब्जेक्ट लिया था लेकिन कॉलेज में पहुंचने के बाद मुझे समझ आ गया कि यह सब्जेक्ट उनके लिए आसान नहीं होने वाला। पहले ही लेक्चर में मुझे ऐसा लगा जैसे स्कूल में दस साल में पढ़ी गई सारी चीजें एक साथ पढ़ाई जा रही हैं। मुझे लगा कि शायद मैंने साइंस लेकर गलती कर दी।”

अमिताभ ने कहा, “पढ़ाई में मुश्किल के कारण मैं एग्जाम में फेल भी हो गया था। हालांकि बाद में ‘अलाउड टू कीप टर्म’ के जरिए मैं सिर्फ दो नंबर से पास हुआ।”

इसके बाद अमिताभ ने अपने पुराने सपने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”एक समय मेरे मन में आईएफएस में जाने का विचार आया था। मैंने भी सिविल सर्विस का एग्जाम देने और भारतीय विदेश सेवा में करियर बनाने के बारे में सोचा था। हालांकि, उस समय मुझे आईएफएस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। मुझे इसका ‘आई’ तक नहीं आता था। इसलिए मैंने इस विचार को छोड़ दिया।”

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