भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मांग की है कि राज्य सरकार कर्नाटक रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड (केआरआईडीएल) में 7 प्रतिशत कमीशन रैकेट में शामिल दो मंत्रियों को तुरंत बर्खास्त करे और मामले की जांच सीबीआई को सौंपे।
पुत्तूर से कांग्रेस विधायक अशोक कुमार राय ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मांग की थी कि वे मंगलुरु में केआरआईडीएल के दो अधिकारियों के कथित गलत व्यवहार की निष्पक्ष जांच का आदेश दें। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों को परेशान किया गया, धमकाया गया और वरिष्ठ मंत्रियों व ‘केआरआईडीएल शुल्क’ के नाम पर प्रोजेक्ट की लागत का सात प्रतिशत तक भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया।
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आर. अशोक ने कहा कि ये आरोप विपक्षी भाजपा या जेडीएस की ओर से नहीं, बल्कि कांग्रेस विधायक अशोक कुमार राय की ओर से लगाए हैं, जिन्होंने केआरआईडीएल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य सरकार को आधिकारिक तौर पर पत्र लिखा था।
विपक्ष के नेता ने कहा, “मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा था कि जो कोई रिश्वत ले, तो उन्हें फोन कर बताया जाए। अब, खुद एक कांग्रेस विधायक ने आधिकारिक तौर पर पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि केआरआईडीएल में अतिरिक्त सात प्रतिशत की वसूली की जा रही है और जो ठेकेदार इस पर सवाल उठाते हैं, उन्हें धमकाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण सबूत है, क्योंकि यह आरोप सत्ताधारी पार्टी (कांग्रेस) के ही एक विधायक की ओर से आया है।”
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने प्रशासन को “कमीशन सरकार” में बदल दिया है और दावा किया कि कर्नाटक में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद अधिकारी भी “गुंडों” जैसा व्यवहार करने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर 100 रुपए जारी किए जाते हैं, तो केवल 30 रुपए का काम होता है, जबकि बाकी 70 प्रतिशत कमीशन में चला जाता है।”
आर. अशोक ने कहा कि जब विपक्षी भाजपा और जेडीएस ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, तो उनसे दस्तावेजी सबूत पेश करने को कहा गया था, लेकिन अब खुद एक कांग्रेस विधायक ने कमीशन का मुद्दा उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के प्रभारी मंत्री और संबंधित विभाग के मंत्री हर महीने कमीशन वसूल रहे हैं।
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया, “भ्रष्टाचार के कारण एक मंत्री पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं, फिर भी इन दो मंत्रियों को कोई डर नहीं है। यह सात प्रतिशत कमीशन राहुल गांधी तक भी पहुंचता है।” आर. अशोक ने दावा किया कि कमीशन प्रणाली के माध्यम से लगभग 800 करोड़ जमा किए जा सकते थे और उन्होंने अपने पहले के इस आरोप को दोहराया कि कर्नाटक को एक एटीएम में बदल दिया गया है।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं की ओर से पहले लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि बी.आर. पाटिल ने आवास विभाग में कमीशन के बारे में बात की थी, जबकि बसवराज रायरेड्डी ने कल्याण कर्नाटक क्षेत्र विकास बोर्ड (केकेआरडीबी) में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में पत्र लिखा था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने आर.बी. थिम्मापुर से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बारे में ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज खुद सौंपे थे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने राज्य सरकार से मांग की, “अगर राज्य सरकार में थोड़ी भी जिम्मेदारी का एहसास है, तो उसे उन दो मंत्रियों को बर्खास्त कर देना चाहिए। कांग्रेस विधायक राय के आरोपों पर आधारित मामले की जांच लोकायुक्त या सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।”
विपक्ष के नेता ने पार्क की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रस्तावित कानून का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार रियल एस्टेट लॉबी के दबाव में इस बिल के जरिए पार्कों पर कब्जे की इजाजत दे रहे हैं।
उन्होंने सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा और जेडी-एस दोनों से सार्वजनिक पार्कों को बचाने का आग्रह किया और मांग की कि राज्य सरकार इस बिल पर सिर्फ बहस कराने के बजाय इसे वापस ले ले।
आर. अशोक ने याद दिलाया कि लगभग 40 साल पहले कांग्रेस सरकार एक कानून लाई थी जिसमें पार्कों और खेल के मैदानों का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करने की इजाजत थी, लेकिन विरोध के बाद उसे वापस ले लिया गया था। विपक्ष के नेता ने टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार की योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्किंग सुविधाओं की कोई जरूरत नहीं थी और राज्य सरकार ने मॉल बनाने के लिए लालबाग की जगह का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
अशोक ने घोषणा की कि भाजपा प्रस्तावित बदलावों के विरोध में 5 और 6 सितंबर को बेंगलुरु के पार्कों में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा, “हम नागरिकों से हस्ताक्षर इकट्ठा करेंगे और उन्हें राज्यपाल को सौंपेंगे। हम ‘पार्क बचाओ, बेंगलुरु बचाओ’ संदेश के साथ एक अभियान शुरू करेंगे।” भाजपा की चल रही पदयात्रा की आलोचना का जवाब देते हुए अशोका ने कहा कि कांग्रेस ने भी विपक्ष में रहते हुए पदयात्राएं की थीं और ऐसे कार्यक्रम स्वभाव से राजनीतिक नहीं होते हैं।


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