September 12, 2026
National

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति

Indonesian President arrives in New Delhi to attend the BRICS summit.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शुक्रवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि भारत, इंडोनेशिया के साथ सहयोग, विकास और समृद्धि की साझा दृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है।

इस बीच, थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेत्केओ भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगी।

इससे पहले बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ते एनदायिशिमिये भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ का प्रतिनिधित्व करने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और अफ्रीकी संघ वैश्विक दक्षिण की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए गहन सहयोग कर रहे हैं।

भारत, वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और विशेष आमंत्रित देशों के नेता हिस्सा लेंगे। ब्रिक्स समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

वहीं, ब्रिक्स साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलिविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “मुझे विश्वास है कि इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के कल्याण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।”

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने, बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने और आर्थिक, व्यापारिक तथा रणनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

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