September 25, 2026
National

एनईपी शिक्षा में आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता को देती है अहमियत : प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 शिक्षा के केंद्र में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, प्रायोगिक शिक्षा और समस्या-समाधान को रखती है। इसके साथ ही उन्होंने कम उम्र से ही छात्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों पर भी प्रकाश डाला।

बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएस) में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में बोलते हुए शिक्षा मंत्री जोशी ने कहा कि शिक्षा नीति का मकसद सिर्फ छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं बल्कि उन्हें गहराई से सोचने, प्रयोग करने, नई चीजें बनाने और असल दुनिया की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कर्नाटक का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने एनईपी 2020 को लागू करना बंद कर दिया है। कर्नाटक ने पहले एनईपी को लागू करना शुरू किया था लेकिन बाद में कांग्रेस सरकार ने इस नीति से पीछे हटने और क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से राज्य शिक्षा नीति पर काम करने का फैसला किया।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि अभी देशभर में 10,000 से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स में 1.1 करोड़ से ज्यादा छात्र काम कर रहे हैं। इन लैब्स के जरिए काम करते हुए छात्र पहले ही 16 लाख से ज्यादा इनोवेशन प्रोजेक्ट बना चुके हैं। अटल टिंकरिंग लैब्स वाले स्कूलों के अपने दौरों को याद करते हुए जोशी ने कहा कि कुछ स्कूलों ने लैब्स को इसलिए बंद रखा क्योंकि शिक्षकों को डर था कि छात्र उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों को बिना किसी डर के सुविधाओं का इस्तेमाल करने और प्रयोग करने की इजाजत दी जानी चाहिए क्योंकि मकसद युवा दिमागों को उनकी सोच और गहराई से सोचने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में स्कूलों में 50,000 और अटल टिंकरिंग लैब्स बनाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में 17,300 से ज्यादा इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल भी बनाई गई हैं।

इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों से निकले कई इनोवेशन का जिक्र किया, जिनमें आईआईटी-मद्रास द्वारा बनाया गया रोबोटिक सेप्टिक टैंक क्लीनर ‘होमोसैप’ और बोलने की क्षमता खो चुके लोगों को आवाज देने के लिए डिजाइन किया गया ‘इलेक्ट्रोलेरिंग्स’ शामिल हैं।

उन्होंने एनआईटी-वारंगल द्वारा तांबे और एल्युमीनियम के बर्तनों के लिए बनाए गए इंडक्शन स्टोव का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे इनोवेशन भले ही छोटे लगें लेकिन ये आम लोगों की रोजमर्रा की कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “हमें काम करना चाहिए, इनोवेशन करना चाहिए, समाधान देने चाहिए… न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी। ‘इनोवेट इन इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’ सिर्फ भारत के लिए नहीं, दुनिया के लिए भी।” उन्होंने कहा कि भारत की 65 प्रतिशत से ज्यादा आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और देश की युवा आबादी को इनोवेशन और विकास को आगे बढ़ाने के एक मौके के तौर पर बताया।

मंत्री जोशी ने नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने की कोशिशों पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि हेल्थकेयर, सस्टेनेबल शहरों, खेती और शिक्षा के क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चार ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए गए हैं, जिन पर कुल 1,490 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन में 18 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया। इन छात्रों ने सरकारी विभागों, इंडस्ट्री और पब्लिक संस्थानों की तरफ से दी गई लगभग 3,158 असल दुनिया की समस्याओं पर काम किया। फ्रांस के नीस शहर में हुए ‘भारत इनोवेट्स’ इवेंट का जिक्र करते हुए जोशी ने कहा कि भारत ने हायर एजुकेशन संस्थानों से निकले 120 डीप-टेक स्टार्टअप्स को वहां दिखाया।

उन्होंने बताया कि फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष ने इनोवेशन शोकेस देखने के लिए शुरू में 20 मिनट का समय तय किया था, लेकिन इनोवेशन देखने के बाद उन्होंने प्रतिभागियों से बातचीत करने में एक घंटे से ज्यादा समय बिताया। जोशी ने कहा कि इसके बाद भारत को कनाडा और दूसरे देशों में भी ऐसे ही शोकेस आयोजित करने के लिए 20 से ज्यादा अनुरोध मिले। उन्होंने इस दिलचस्पी का कारण भारतीय युवाओं की बढ़ती काबिलियत और देश की पॉलिसी में स्थिरता को बताया।

उन्होंने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का लक्ष्य मुख्य रूप से आज की युवा पीढ़ी के लिए है, जो आने वाले दशकों में भारत के विकास का फायदा उठाएगी। जोशी ने टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में भारत की तरक्की का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में 5जी टेक्नोलॉजी विकसित की गई है और 6जी टेक्नोलॉजी भी भारतीय टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके विकसित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अभी भारत में बनने वाले स्मार्टफोन की डिजाइन देश के बाहर तैयार की जाती है, लेकिन आने वाले वर्षों में लक्ष्य यह होगा कि फोन की डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही हो और उन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाए।

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