मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में तीन खंडों में संकलित 1,980 पृष्ठों की पुस्तक ‘पंजाब दा इतिहास’ का विमोचन किया। इसमें उन्होंने पंजाब की सदियों पुरानी विजय यात्रा, उथल-पुथल और परिवर्तन को दस्तावेजीकृत करना एक बड़ी जिम्मेदारी बताया। सभा को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि पंजाब लंबे समय से कला, संस्कृति और साहित्य का भंडार रहा है और उन्होंने इसकी विरासत को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
मान ने कहा कि पंजाब प्राचीन काल से ही सभ्यता और संस्कृति का उद्गम स्थल रहा है, जहां के मेहनती और साहसी लोगों ने इस भूमि पर इतिहास के कई अध्यायों को घटित होते देखा है।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण किसी भी समाज की पहचान की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, “वही राष्ट्र जीवित रहते हैं जो अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हैं, जबकि जो अपने गौरवशाली अतीत की उपेक्षा करते हैं वे धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है।
मान ने कहा कि पंजाबियों को महान सिख गुरु साहिबान से त्याग और वीरता की विरासत मिली है, जिन्होंने लोगों को अत्याचार, उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि यह भावना पंजाबी चरित्र का अभिन्न अंग बनी हुई है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान पंजाबियों द्वारा किए गए बलिदान अतुलनीय थे। उन्होंने कहा कि पंजाब का इतिहास, संस्कृति, बलिदान और उपलब्धियां यहां के लोगों के लिए अपार गौरव का स्रोत हैं।
मान ने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब की समृद्ध विरासत को संरक्षित और प्रलेखित किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास को समझ सकें और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सकें।


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