चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर पलटवार करने की कोशिश में, राज्य भाजपा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने आरोप लगाया है कि अतीत में कांग्रेस नेताओं ने ही ‘वोट चोरी’ की थी और इसलिए विपक्ष को भारत के चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
भिवानी जिले के बहल कस्बे में एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस की यह प्रवृत्ति रही है कि चुनाव हारने के बाद वह ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाती है और ईवीएम पर सवाल उठाती है। उन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी भी अपने पार्टी सहयोगी दीपेंद्र सिंह हुड्डा से 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान तत्कालीन झज्जर उपायुक्त से कथित तौर पर मिली ‘विशेष मदद’ के बारे में सवाल करेंगे?
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि हुड्डा ने स्वयं 2009 के चुनावों के दौरान तत्कालीन डीसी चंद्र प्रकाश से मदद लेने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सरकारी अधिकारी किसी उम्मीदवार को इस तरह की मदद कैसे दे सकता है। गुप्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव पर दिए गए फैसले के बाद 1975 में लागू आपातकाल का भी जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र और चुनावी प्रणाली पर सवाल उठाने से पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए।
गुप्ता ने कहा कि वायनाड, केरल या कर्नाटक में चुनाव जीतने पर कांग्रेस ने ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया को स्वीकार किया, लेकिन चुनाव हारने के बाद उन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के जनादेश को स्वीकार करना चाहिए और अपनी हार के कारणों पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारें किसानों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए काम कर रही हैं। गुप्ता ने किसानों से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से संगठित होने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र के विकास में पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल के योगदान की भी प्रशंसा की।


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