सीएसआईआर-हिमालयन जैव संसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर ने सोमवार को अपने परिसर में 85वां सीएसआईआर स्थापना दिवस मनाया, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में संगठन के योगदान को उजागर किया गया। 1942 में स्थापित वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की अखिल भारतीय स्तर पर उपस्थिति है, जिसमें 37 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, 39 आउटरीच केंद्रों, एक नवाचार परिसर और तीन इकाइयों का नेटवर्क शामिल है।
सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की प्रमुख पहलों, जिनमें पुष्पकृषि मिशन, सुगंध मिशन और संरक्षणशालाएं शामिल हैं, पर प्रकाश डाला। उन्होंने जैवसंसाधन संरक्षण और अन्वेषण पहलों के अंतर्गत संस्थान द्वारा खोजी गई नई प्रजातियों के बारे में भी बताया।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, डॉ. यादव ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को उभरती चुनौतियों का समाधान करने और नवीन तकनीकी समाधानों के माध्यम से लोगों की जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
FARE लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ निदेशक और हरियाणा के सोनीपत स्थित NIFTEM के पूर्व कुलपति डॉ. चिंदी वासुदेवप्पा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने CSIR और CSIR-IHBT की उपलब्धियों पर बधाई देते हुए कहा कि CSIR अपनी स्थापना से ही देश में अनुसंधान और विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। उन्होंने कहा कि CSIR ने भारत में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण शोध करने में अहम भूमिका निभाई है और साथ ही वैश्विक वैज्ञानिक प्रगति में भी योगदान दिया है। उन्होंने संस्थान को भविष्य के प्रयासों में निरंतर सफलता की कामना की।
नई दिल्ली स्थित बीआरआईसी-राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने पादप जीनोम अनुसंधान में हुए हालिया विकास और विज्ञान एवं समाज पर उनके प्रभावों के बारे में बताया।
इस अवसर पर मशरूम अनुसंधान और मूल्यवर्धन में सहयोग हेतु सीएसआईआर-आईएचबीटी और हिमालयन माइकोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड, पालमपुर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। जैविक कचरे को खाद में परिवर्तित करने के लिए एक अपघटक उपलब्ध कराने हेतु पालमपुर नगर निगम के साथ एक सामग्री हस्तांतरण समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो सतत अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक और कदम है।


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