ओडिशा में कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से बुलाए गए ‘बंद’ के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। नर्सों और अस्पताल के कर्मचारियों से लेकर आम लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण आम नागरिकों में विपक्षी पार्टियों के खिलाफ आक्रोश दिखाई दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को आम जनता को परेशान करने के बजाय सरकार और जिम्मेदार नेतृत्व को निशाना बनाना चाहिए।
भुवनेश्वर की एक आम महिला सुनीता राज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसका (सड़क पर प्रदर्शन) कोई फायदा नहीं है। महिला ने कहा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम और उसके फैसलों को जानना और समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “सरकार के गलत फैसलों से हर किसी को नुकसान होता है। ऐसा नहीं है कि इनसे सिर्फ राजनीतिक दलों पर असर पड़ता है।”
सुनीता राज ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि सभी लोगों को फायदा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर प्रदर्शन करने से लोगों का फायदा हो तो ऐसे प्रदर्शनों का हम भी समर्थन करेंगे, लेकिन जरूरी कामों के लिए घरों से निकलने वाले लोगों को जाने देना चाहिए।”
सुनीता राज ने कहा कि विपक्ष ने जिस तरह प्रदर्शन शुरू किया है, इससे जनता को ही परेशानी हो रही है। विपक्ष को सरकार को परेशान करना चाहिए। जब हम खुद परेशान हैं, उस समय विपक्ष भी हमें परेशान कर रहा है।
एक नर्स ने आईएएनएस से कहा कि यहां विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस कारण हमें कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर आना पड़ा है। एक अन्य नर्स ने कहा कि वह तीन किलोमीटर दूर से चलकर आई हैं। आगे कई किलोमीटर दूर और जाना है। अगर गाड़ी मिलती है तो सही होगा, लेकिन पैदल ही जाना पड़ेगा।
बता दें कि विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, संशोधित एमएमडीआर अधिनियम को रद्द करने, पाठ्यपुस्तकों में गलतियों पर कार्रवाई, शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे और बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे जैसी मांगों को लेकर ‘बंद’ का आह्वान किया है।
सीपीएम के ओडिशा महासचिव सुरेश पाणिग्रही ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन ने आज ओडिशा में बंद का आह्वान किया है। पिछले 10 दिनों से हम इस बंद को सफल बनाने के लिए प्रचार कर रहे हैं। ओडिशा भर से, सुंदरगढ़ से लेकर मलकानगिरी तक, जो खबरें मिल रही हैं, सभी कार्यकर्ता और नेता सड़कों पर हैं। बंद का आह्वान करते समय हमने जो पहला मुद्दा उठाया था, वह एमएमजीआर संशोधन अधिनियम को रद्द करने का था।


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