October 9, 2026
Punjab

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस शील नागू ने सीबीआई जांच के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू ने शुक्रवार को पंजाब सरकार की उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से जुड़े लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के सीबीआई को दिए गए उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

जब यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की बेंच के सामने आया, तो जस्टिस दत्ता ने कहा, “इसकी सुनवाई जस्टिस नागू नहीं कर सकते।” न्यायमूर्ति नागु ने शीर्ष न्यायालय में पदोन्नति से पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अक्सर आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार से जुड़े मामलों को निपटाया था।

पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कहा कि वे न्यायमूर्ति नागू द्वारा दिए गए निर्णयों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, “नहीं, नहीं। हम बहुत कठिन समय से गुजर रहे हैं, श्री गुप्ता। किसी को नहीं पता कि हमला कहां से होगा। 17 अन्य बेंच भी हैं। हम मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे, जैसा कि आपने उल्लेख किया है।”

सोमवार को राज्य सरकार ने अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा दायर याचिका पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की। इन आरोपों में धन हस्तांतरण के लिए नकद और अनुकूल नीतियां प्राप्त करने के लिए नकद का लेन-देन शामिल है। याचिकाकर्ता ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आम आदमी पार्टी सरकार को पत्र भेजे जाने के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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