मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 1 से 5 और अन्य लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में आवासीय मकानों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) विभाग के अभियान पर रोक लगा दी। इस मामले की सुनवाई 3 नवंबर को दोबारा होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ ने ‘गौरव कोहली बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें टीसीपी विभाग को इस तरह की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार दिया गया है।
डीएलएफ फेज 1 से 5 में आवासीय मकानों में व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित एक संबंधित मामला भी मंगलवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस मामले पर सुनवाई नहीं की क्योंकि क्षेत्राधिकार का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। अब इस मामले की सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) अमित मधोलिया के नेतृत्व में चलाए गए प्रवर्तन अभियान के परिणामस्वरूप व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कथित रूप से इस्तेमाल किए जा रहे 160 से अधिक घरों को सील कर दिया गया है। विभाग ने आवासीय भूखंडों के दुरुपयोग और स्वीकृत भवन योजनाओं के उल्लंघन को लक्षित करते हुए डीएलएफ फेज 3 और 4, सुशांत लोक-1 और साउथ सिटी-1 सहित अन्य क्षेत्रों में सीलिंग और विध्वंस अभियान चलाए हैं।
इस कार्रवाई से शहर की पुरानी लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में आवासीय परिसरों से कार्यालय, क्लिनिक, कैफे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाने वाले संपत्ति मालिकों और किरायेदारों के बीच चिंता पैदा हो गई थी। इसने स्थापित मोहल्लों में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग के विवादास्पद मुद्दे को भी सुर्खियों में ला दिया।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का पहले से सील किए गए मकानों पर क्या असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि क्या यह रोक केवल तोड़फोड़ की कार्यवाही पर है या अगली सुनवाई तक सभी आगे की कानूनी कार्रवाई, जिसमें नए सिरे से सील करना भी शामिल है, पर रोक लगाती है।


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