शिमला स्थित एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में मंगलवार को “शिक्षण-अधिगम और अनुसंधान: व्यावहारिक अनुप्रयोग” शीर्षक से एक सप्ताह का संकाय विकास कार्यक्रम शुरू हुआ। इसका उद्देश्य संकाय सदस्यों के बीच शिक्षण पद्धतियों, अनुसंधान क्षमताओं, नवाचार और अकादमिक ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग को मजबूत करना है।
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य प्रोफेसर ममता मोक्ता उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि थीं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि शिक्षकों का दायित्व केवल ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि छात्रों को सही दिशा और प्रेरणा प्रदान करना भी है। उन्होंने शिक्षकों को नवोन्मेषी बने रहने, अपने ज्ञान को निरंतर अद्यतन करने और ऐसी विशेषज्ञता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो उन्हें प्रभावी मार्गदर्शक और पेशेवर बनाएगी। उन्होंने एक ऐसा शिक्षण वातावरण बनाने के महत्व पर बल दिया जो छात्रों को उभरती चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने के लिए तैयार करे।
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के संकाय डीन प्रोफेसर डॉ. अश्वनी शर्मा ने मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार से शिक्षक छात्रों से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ पाते हैं और इससे शिक्षण-अधिगम की समग्र प्रक्रिया में सुधार होता है।
कुलपति देविंदर शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का विकास केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों को निरंतर अपने शोध उन्मुखीकरण, नवोन्मेषी सोच और व्यावसायिक अनुभव को मजबूत करना चाहिए।


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