October 19, 2026
Entertainment

जैकी श्रॉफ ने बताया- कैसे उन्हें ‘जग्गू दादा’ के नाम से मिली पहचान?

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ ने एक बार बताया कि उन्हें ‘जग्गू दादा’ के नाम से इतनी व्यापक पहचान कैसे मिली। लोकप्रिय चैट शो ‘रोंदेवू विद सिमी गरेवाल’ में शामिल होने के दौरान जैकी ने बताया कि उनके अनुसार, जिस चॉल में वे पले-बढ़े थे, वहां उनके बड़े भाई ही असली ‘दादा’ थे।

उन्होंने याद करते हुए बताया कि उनके भाई अपनी कम्युनिटी के लिए एक संरक्षक की तरह थे, जो जरूरत पड़ने पर हमेशा दूसरों की मदद के लिए मौजूद रहते थे। बदकिस्मती से एक बार किसी को बचाने की कोशिश में उनके भाई समुद्र में डूब गए। उनके भाई को तैरना नहीं आता था, इसलिए जैकी ने उन्हें बचाने के लिए एक केबल (रस्सी) फेंकी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

अपने भाई की निस्वार्थ भावना से प्रेरित होकर जैकी ने उनके नक्शेकदम पर चलने का फैसला किया और आगे चलकर वे खुद ‘जग्गू दादा’ बन गए।

शो की होस्ट सिमी से इस बारे में बात करते हुए जैकी ने कहा, “मैंने उन्हें डूबते हुए देखा। मैं बस देखता रह गया। मैं 10 साल का था और बहुत डरा हुआ था। मैं समुद्र में कूद भी नहीं पाया। अगर मैं कूदता तो शायद मैं भी डूब जाता। हमने एक रस्सी फेंकी। उन्होंने उसे पकड़ भी लिया था, लेकिन वह उनके हाथ से फिसल गई। उन्होंने कुछ देर तक संघर्ष किया, और फिर वे (उनके भाई) भी डूब गए। अपने ही भाई को खो देना, जो आपका रक्षक था, और उसे अपनी आंखों के सामने समुद्र में डूबते हुए देखना बहुत ही भयानक अनुभव था।”

इतने साल बीत जाने के बाद भी जैकी आज भी उस चॉल में जाते हैं, जहां वे कभी रहा करते थे। अगर उनके करियर की बात करें तो जैकी पहली बार 1982 में देव आनंद की फिल्म ‘स्वामी दादा’ में एक छोटे से रोल में नजर आए थे। हालांकि, एक लीड एक्टर के तौर पर उन्होंने 1983 में सुभाष घई की फिल्म ‘हीरो’ से डेब्यू किया।

उन्होंने कई अन्य यादगार नाटकों में अभिनय किया, जैसे ‘अंदर बाहर (1984)’, ‘जानू (1985)’, ‘कर्मा (1986)’, ‘राम लखन (1989)’, ‘त्रिदेव (1989)’, ‘परिंदा (1989), ‘सौदागर (1991)’, ‘खलनायक (1993)’, ‘गर्दिश’ (1993), ‘1942: ए लव स्टोरी (1994)’, ‘रंगीला (1995)’, ‘बॉर्डर (1997)’, ‘अग्नि साक्षी (1996)’, ‘देवदास (2002)’, ‘मिशन कश्मीर (2000)’, ‘धूम 3 (2013)’, ‘हैप्पी न्यू ईयर (2014)’ ‘भारत (2019)’, और ‘सूर्यवंशी (2021)’ सहित अन्य।

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