October 24, 2026
Entertainment

कॉन्वेंट स्कूल से इंटरनेशनल सिनेमा तक, मिक्की सिंह ने बताया अरुणा के किरदार का सफर

अभिनेत्री मिक्की सिंह इन दिनों पहली इंडो-अमेरिकन अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म ‘अ मॉस्किटो इन द ईयर’ में सिस्टर अरुणा के महत्वपूर्ण किरदार में नजर आ रही हैं। अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में फिल्म और अपने किरदार के बारे में बताया।

अभिनेत्री ने फिल्म से जुड़े अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताया, “अंतरराष्ट्रीय फिल्म में महत्वपूर्ण रोल निभाना ही मेरे सबसे खास बात थी। इसका किरदार बहुत शानदार तरीके से लिखा गया था, लेकिन यह बहुत डिमांडिंग रोल है और इसलिए मुझे लगा कि यह करने लायक एक अच्छा रोल है।”

मिक्की सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी शिक्षा कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की है, जिस वजह से उस स्कूल की सभी नन्स के हावभाव को ध्यान में रखते हुए अरुणा के किरदार को निभाया है।

अभिनेत्री ने निर्देशक निकोला रिंकारी के साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए बताया, “फिल्म के सीन्स, किरदार को लेकर उनका विजन बिल्कुल क्लियर रहता है। अभिनेता के साथ अच्छे से पेश आते हैं और उन्हें अपनी तरफ से कुछ भी करने की आजादी देते हैं। उनके लिए यह जरूरी नहीं है कि एक एक्टर को स्क्रिप्ट में लिखी हर बात को बिल्कुल वैसे ही करना पड़े। वह इम्प्रोवाइजेशन को काफी अहमियत देते हैं। साथ ही शूटिंग से पहले काफी तैयारी भी करते हैं।”

अभिनेत्री ने कहा, “वह कलाकार से वही चीज निकलवाते हैं, जो उस किरदार से उन्हें चाहिए होती है। एक्टर के पास आजादी थी, लेकिन उनके विजन के दायरे में।” निकोला रिनसियारी द्वारा निर्देशित फिल्म में अभिनेत्री के अलावा जेक लेसी और नाजानिन बोनियादी अहम भूमिका में हैं।

मिक्की सिंह ने ब्रिटिश एक्ट्रेस नाजानिन बोनिया के साथ स्क्रीन शेयर करने के अनुभव को याद करते हुए कहा, “वह शानदार अभिनेत्री होने के साथ-साथ बेहतरीन इंसान भी हैं। उन्होंने मुझे यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं कोई सुपरस्टार या इंटरनेशनल स्टार हूं। मुझे लगा जैसे मैं दो दोस्तों के साथ काम कर रही हूं।”

जब आईएएनएस ने मिक्की सिंह से अलग कल्चर पर काम करने के अनुभव पर सवाल किया तो अभिनेत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि हर कल्चर में फिल्ममेकिंग एक जैसी ही होती है। एक्टर्स की तैयारी की प्रक्रिया भी एक जैसी ही होती है। हमने यह फिल्म 20 दिनों में पूरी की और सब कुछ बहुत बारीकी से प्लान किया गया था। हमें अपना काम उसी दिन खत्म करना होता था। हमारे पास यह कहने की गुंजाइश नहीं थी कि हम बाकी काम अगले दिन पूरा कर लेंगे। मुझे लगता है कि इस प्रोजेक्ट में तैयारी और प्रोफेशनलिज्म का लेवल बहुत हाई था।”

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