October 29, 2026
Entertainment

ओटीटी ने कहानियों और महिला किरदारों को दी नई पहचान, बड़े पर्दे पर भी बढ़ीं दर्शकों की उम्मीदें : दिव्या दत्ता

अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में ओटीटी प्लेटफॉर्म के कारण फिल्मों और वेब सीरीज में कहानियां कहने के बदलते अंदाज पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अब ऐसी कहानियों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिनसे दर्शक खुद को जोड़ सकें। खासकर महिलाओं के किरदारों में यह बदलाव साफ दिखाई देता है। पहले जहां अभिनेत्रियों को अक्सर सीमित उम्र तक ही मुख्य भूमिकाएं मिलती थीं, वहीं अब 40 साल की उम्र के बाद भी उन्हें कई मजबूत और अलग-अलग परतों वाले किरदार निभाने का मौका मिल रहा है।

दिव्या ने कहा, ”ओटीटी के आने के बाद कहानी कहने पर काफी जोर दिया जाने लगा है। अब ऐसी वास्तविक कहानियां सुनाई जा रही हैं, जिनसे लोग खुद को जोड़ सकें। मुझे लगता है कि ओटीटी ने अलग-अलग उम्र की महिलाओं के लिए अच्छे किरदारों के रास्ते खोले हैं। अब 20, 30 या 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए भी ऐसे किरदार लिखे जा रहे हैं, जिनमें अभिनय करने की काफी गुंजाइश होती है। पहले यह सोचना भी मुश्किल था कि इस उम्र की महिलाओं को किसी कहानी में मुख्य भूमिका मिल सकती है लेकिन अब किरदारों में पहले के मुकाबले ज्यादा गहराई देखने को मिलती है।”

एक्ट्रेस ने कहा, ”ओटीटी ने इंसानी व्यवहार को ज्यादा वास्तविक तरीके से दिखाने का मौका दिया है। किसी मुश्किल परिस्थिति में हर इंसान की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। गुस्सा करना या गलती कर बैठना किसी व्यक्ति को पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं बना देता। हर इंसान के व्यक्तित्व में कई पहलू होते हैं और ओटीटी ने किरदारों में इन्हीं पहलुओं को जगह दी है और अच्छी लेखनी को बढ़ावा दिया है।”

दिव्या ने कहा, ”दर्शकों ने भी कहानियों में आए इस बदलाव को पसंद किया है। ओटीटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार, अपनी पसंद के समय पर और अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ भी देख सकते हैं। वे चाहें तो अकेले देख सकते हैं या परिवार के साथ बैठकर इसका आनंद ले सकते हैं। जब दर्शकों को इस तरह की स्वतंत्रता मिलती है, तो मनोरंजन की दुनिया में भी बदलाव आता है।”

उन्होंने आगे कहा, ”ओटीटी पर बेहतर कहानियां और मजबूत किरदार देखने के बाद दर्शकों की उम्मीदें सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों से भी बढ़ गई हैं। अब दर्शक बड़े पर्दे पर भी ऐसे किरदार देखना चाहते हैं, जिनमें गहराई और वास्तविकता हो। पहले इस तरह की उम्मीद कम देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह दर्शकों की पसंद का हिस्सा बन गई है। उन्होंने इस बदलाव को सकारात्मक बताया।”

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