इंदिरा गांधी राष्ट्रीय महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस का आयोजन भाषा और इसकी समृद्ध साहित्यिक परंपराओं के महत्व को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया। विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति जागरूकता पैदा करने और भाषा एवं साहित्य के प्रति उनकी रुचि, सराहना और सम्मान को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पूर्व कुलपति राधे श्याम शर्मा इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि संस्कृति, भावनाओं और विविधता को एकता के एक साझा सूत्र में पिरोने वाला एक शक्तिशाली साधन है।
शर्मा ने कहा कि हिंदी भारत की सीमाओं को पार कर चुकी है और विश्व भर के विभिन्न देशों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में हिंदी का शिक्षण और अध्ययन बड़े उत्साह से किया जा रहा है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी फिल्मों और गीतों ने हिंदी भाषा की लोकप्रियता और वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
शर्मा ने छात्रों को हिंदी का अधिक प्रयोग करने और हिंदी साहित्य पढ़ने एवं अध्ययन करने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। कॉलेज के प्रधानाध्यापक कुशल पाल ने बताया कि 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को भारत संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। यद्यपि सभी को अनेक भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए, फिर भी मातृभाषा हिंदी को सर्वोच्च सम्मान दिया जाना चाहिए। तभी हम हिंदी के विकास और संवर्धन में सार्थक योगदान दे सकते हैं।
कॉलेज के पुस्तकालय ने हिंदी पुस्तकों की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। शर्मा ने कॉलेज के शिक्षकों के साथ प्रदर्शनी का दौरा किया और प्रदर्शित पुस्तकों की समीक्षा की। उन्होंने छात्रों को मोबाइल फोन पर निर्भरता कम करने और पुस्तकों को अपना मित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रदर्शनी में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं की पुस्तकें, प्रसिद्ध लेखकों की रचनाएँ, संदर्भ पुस्तकें और अन्य ज्ञानवर्धक एवं शैक्षिक साहित्य प्रदर्शित किए गए।

