भारतीय विद्युत कर्मचारी संघ (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बुधवार को हाल ही में पारित सतत परमाणु ऊर्जा दोहन एवं विकास (शांति विधेयक 2025) का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून देश के नागरिकों के लिए गंभीर खतरे पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी और विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया है। पहले यह क्षेत्र सरकार के सख्त नियंत्रण में था क्योंकि परमाणु ऊर्जा में कोई भी दुर्घटना बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बन सकती थी। नए कानून के तहत सुरक्षा और जवाबदेही प्रणाली कमजोर हो गई है।
उन्होंने कहा कि इस कानून, चारों श्रम संहिताओं और किसान विरोधी बीज विधेयक के खिलाफ 15 जनवरी को जींद में एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में हजारों कर्मचारी, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े कार्यकर्ता और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान भाग लेंगे। सम्मेलन में सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा।
सम्मेलन के सफल आयोजन और स्थानीय स्तर पर अन्य सभी संगठनों के साथ समन्वय के लिए, अखिल हरियाणा विद्युत निगम श्रमिक संघ के राज्य अध्यक्ष सुरेश राठी और सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा के जिला अध्यक्ष संजीव डंडा को प्रभारी नियुक्त किया गया है।
नए परमाणु कानून के खतरों को समझाते हुए लांबा ने कहा कि अगर किसी निजी कंपनी द्वारा संचालित परमाणु संयंत्र में कोई दुर्घटना होती है, तो नुकसान कंपनी को नहीं बल्कि आम जनता और सरकार को उठाना पड़ेगा। दूसरे शब्दों में, उन्होंने आशंका जताई कि मुनाफा निजी कंपनियों को जाएगा, जबकि जोखिम जनता को उठाना पड़ेगा।

