N1Live National लोकतंत्र बचाने के लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा: कांग्रेस
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लोकतंत्र बचाने के लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा: कांग्रेस

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लगातार दूसरे दिन इंडिया गठबंधन के नेताओं के लिए लंच का आयोजन किया। इस मौके पर पार्टी ने गुरुवार को कहा कि विपक्ष लोकतंत्र, वोटरों और देश के आम लोगों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहा है। यह घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विपक्ष के प्रदर्शन के बीच हुआ है।

खड़गे ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी के एक रेस्तरां में इंडिया गठबंधन के नेताओं के लिए लंच का आयोजन किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा, “हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां हैं। हम यही कर रहे हैं। देश के मतदाताओं और आम लोगों की रक्षा के लिए यह हमारे लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। हमारा सीधा मकसद मतदाताओं और आम लोगों की रक्षा करना है।”

वेणुगोपाल ने कहा कि इंडिया गठबंधन ने विपक्षी गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का अनुरोध पहले ही कर दिया था। उन्होंने कहा, “हमने राष्ट्रपति से उनके और इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच बैठक के लिए पहले ही अनुरोध किया है। पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था।”

वेणुगोपाल ने बताया कि इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने विपक्ष से उन नेताओं के नाम मांगे जो प्रस्तावित बैठक में शामिल होंगे। हमने इंडिया ब्लॉक के सभी नेताओं को शामिल किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मारपीट और बदसलूकी के आरोपों में दर्ज एफआईआर पर वेणुगोपाल ने दिल्ली पुलिस पर विरोध कर रहे विपक्षी नेताओं के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि हमने जंतर-मंतर पर बहुत शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन किया। सरकार ने यह जगह विरोध-प्रदर्शन के लिए तय की है। परसों, जब हम ईसीआई दफ्तर के बाहर विरोध करने गए, तो उन्होंने हमें रोक दिया। वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी सिर्फ पांच सांसदों के साथ बैठे थे। हम विरोध करना चाहते थे और ऐसी जगह मांग रहे थे जहां हम विरोध कर सकें। इसलिए, उन्होंने हमें जंतर-मंतर जाने को कहा। वहां भी उन्होंने (सरकार ने) हमें रोक दिया। आप देख ही रहे हैं। कल उन्होंने पूरी दिल्ली पुलिस तैनात कर दी थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई में उन छात्रों, युवाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया जो विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। वेणुगोपाल ने कहा कि वे हमारे छात्रों और युवाओं पर हमला कर रहे हैं। और जब हमारे कार्यकर्ता घायल हुए, तब विपक्ष के नेता इसमें शामिल हुए। अब आप यह सब कह रहे हैं। दिल्ली पुलिस का तरीका बहुत बेरहम था।

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी अधिकारियों की आलोचना करते हुए कहा कि चुने हुए जन-प्रतिनिधि होने के बावजूद विपक्षी नेताओं को चुनाव आयुक्तों से मिलने से रोका गया। हुड्डा ने कहा कि हम परसों चुनाव आयोग जाना चाहते थे। हम चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे; हम चुने हुए जन-प्रतिनिधि हैं, लेकिन हमें मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद विपक्ष ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का फैसला किया, लेकिन आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को फिर से विरोध करने के उनके अधिकार का इस्तेमाल करने से रोका गया।

हुड्डा ने कहा कि कल हम जंतर-मंतर जाना चाहते थे। हम जंतर-मंतर पर धरना देना चाहते थे क्योंकि हमें मिलने नहीं दिया गया था। लेकिन कल हमें जंतर-मंतर पर बैठने भी नहीं दिया गया; आपने देखा कि पुलिस ने कितनी बेरहमी दिखाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पक्ष लोगों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में सत्ता में बैठी तानाशाही ताकत देश के लोगों की आवाज दबाना चाहती है। देश में भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से चुनाव हो रहे हैं, हम ऐसा नहीं होने देंगे।”

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा कि लंच मीटिंग्स के बावजूद विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। हम यह बिल्कुल साफ कर रहे हैं कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, हम अपना विरोध जारी रखेंगे। यह प्रदर्शन राहुल गांधी, खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, वेणुगोपाल और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं के नेतृत्व में जारी रहेगा।

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि विपक्ष के नेता खड़गे के बुलावे पर इकट्ठा हुए थे और लंच के दौरान बातचीत के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि हम यहां लोकतंत्र को बचाने आए हैं। हम खड़गे के बुलावे पर यहां आए हैं। यहां लंच है। लंच के दौरान खड़गे और वरिष्ठ नेता जो रणनीति बनाएंगे, उसी का पालन किया जाएगा।

तन्खा ने बताया कि निमंत्रण मिलने से पहले वह सुप्रीम कोर्ट में थे और उसके बाद तुरंत बैठक में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि लोकतंत्र को बचाने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, हम करेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि ज्ञानेश कुमार को जाना होगा। जब तक चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उस पर भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक इसका कोई समाधान नहीं है।

राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सुरक्षाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों पर तन्खा ने कहा कि कांग्रेस नेता और प्रियंका गांधी सुरक्षा बलों के साथ जानबूझकर दुर्व्यवहार नहीं कर सकते। तन्खा ने कहा कि राहुल और प्रियंका कभी भी सुरक्षा बलों के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकते। यह अविश्वसनीय है। अगर वे विरोध कर रहे हैं और आप उनके खिलाफ बल प्रयोग कर रहे हैं, तो उस प्रक्रिया में जो भी धक्का-मुक्की होती है, वे अपने बचाव में ऐसा कर रहे होते हैं। जब कोई काम बचाव में किया जाता है, तो वह अपराध नहीं माना जाता।

उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर गलत इरादे से दर्ज की गई है और इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव कुमार राय ने कहा कि उनकी पार्टी चल रही राजनीतिक लड़ाई में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ खड़ी है।

सीपीआई सांसद पी संतोष कुमार ने भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और दावा किया कि विपक्षी सांसदों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों के लिए किया जाता है, उसे विपक्ष के लिए बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “बात यह है कि दिल्ली में जंतर-मंतर ही एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ हम अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। लेकिन इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। 200 सांसदों के लिए 40,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। यह कैसी व्यवस्था है? वहां ज्यादा से ज्यादा 200 या 240 लोग हैं और उन्हें रोकने के लिए 40,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं

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