पालमपुर और उसके आसपास के इलाकों में आवारा पशुओं का बढ़ता खतरा एक और जान ले चुका है। पालमपुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर भावरना बाजार में एक आवारा बैल की चपेट में आने से संसार चंद पटियाल की मौत हो गई। इस दुखद घटना ने एक बार फिर इस क्षेत्र में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशुओं से उत्पन्न गंभीर खतरे को उजागर किया है।
इस ताजा घटना के साथ, पालमपुर क्षेत्र में आवारा पशुओं से संबंधित मौतों की संख्या पिछले दो वर्षों में बढ़कर नौ हो गई है, जिससे यह क्षेत्र में नागरिक और सार्वजनिक सुरक्षा के सबसे गंभीर मुद्दों में से एक बन गया है। इससे पहले की रिपोर्टों में आवारा सांडों के हमलों और मवेशियों से जुड़े सड़क हादसों के कारण कई मौतों और चोटों का दस्तावेजीकरण किया गया है।
निवासियों का कहना है कि आवारा बैल और मवेशी अक्सर राजमार्गों, संपर्क मार्गों, बाज़ार क्षेत्रों और आवासीय कॉलोनियों में घूमते हुए देखे जाते हैं, खासकर शाम और रात के समय। वाहन चालक, पैदल यात्री और वरिष्ठ नागरिक सबसे अधिक असुरक्षित रहते हैं। मानसून के मौसम में यह जोखिम और भी बढ़ जाता है, जब कम दृश्यता के कारण जानवरों से अचानक सामना होना और भी खतरनाक हो जाता है।
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम, जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से बार-बार सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने और उनके लिए पर्याप्त आश्रय स्थल स्थापित करने हेतु समन्वित कार्रवाई करने का आग्रह किया है। बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद, उनका आरोप है कि स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
पालमपुर में यह मुद्दा एक गंभीर जन चिंता का विषय बन गया है, और हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों ने भी इसे उठाया था। जन प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए एक प्रभावी नीति, गौशालाओं के विस्तार, पशुओं को छोड़ने के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आगे होने वाली जानमाल की हानि को रोकने के लिए तत्काल उपायों की मांग की है।
संसार चंद पटियाल की मृत्यु से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग फिर से उठ रही है। निवासियों का कहना है कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सड़कों पर और भी निर्दोष जानें जा सकती हैं। उन्होंने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से आग्रह किया है कि आवारा पशुओं की समस्या को महज़ एक नागरिक असुविधा के बजाय सार्वजनिक सुरक्षा आपातकाल के रूप में देखा जाए।

