मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने और लगातार कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए, हिमाचल प्रदेश सरकार ने 207.11 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना (आईजीएमएसएसवाई) शुरू करने की मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु ने कहा कि राज्य में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, जो दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रभावित करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कमजोर वर्गों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना स्वास्थ्य संबंधी बोझ को काफी हद तक कम करेगा और साथ ही एक मजबूत और अधिक उत्पादक समाज के निर्माण में योगदान देगा।
इस योजना का उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, पर्याप्त कैलोरी और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करना है। राज्य भर में लगभग 2,99,488 पात्र लाभार्थियों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य छह महीने से छह वर्ष की आयु के बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना है, साथ ही पूरक आहार को बढ़ाकर मातृ पोषण को भी बेहतर बनाना है।
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे कुपोषण को दूर करना है, विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 महत्वपूर्ण दिनों के दौरान। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्यक्रम शिशु मृत्यु दर और रुग्णता को कम करने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने के लिए पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल संबंधी उपायों को एकीकृत करेगा।
गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) और मध्यम रूप से कुपोषित (MAM) बच्चों और कम वजन वाले शिशुओं सहित उच्च जोखिम वाले समूहों की शीघ्र पहचान और निरंतर निगरानी पर विशेष जोर दिया जाएगा। सुदृढ़ रेफरल प्रणाली और अनुवर्ती प्रोटोकॉल पोषण पुनर्वास केंद्रों को नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की घर-आधारित देखभाल सेवाओं से जोड़ेंगे।
डिजिटल ट्रैकिंग टूल, मातृ एवं शिशु संरक्षण कार्ड और राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर समन्वित समीक्षाओं के माध्यम से निगरानी को मजबूत किया जाएगा।


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