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टिहरी में किसानों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कार्यशाला का आयोजन, अब बुढ़ापे में नहीं होंगे पैसों के मोहताज

A workshop was organized in Tehri to ensure the economic security of farmers, who will no longer be dependent on money in their old age.

जिस तरह अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की वृद्धावस्था की आर्थिक सुरक्षा के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं, उसी तर्ज पर अब किसानों के लिए भी ऐसे कदम तेज किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें बुढ़ापे में किसी तरह की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

इसी दिशा में उत्तराखंड के टिहरी जिले के विकासखंड सभागार, चंबा में शनिवार को किसानों को वित्तीय रूप से जागरूक करने के उद्देश्य से एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को आर्थिक प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे अपने जीवन में छोटे-छोटे वित्तीय बदलाव करके भविष्य के लिए बेहतर बचत और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

कार्यशाला में किसानों को यह समझाया गया कि कैसे नियमित बचत और सही वित्तीय योजना के माध्यम से वे अपनी वृद्धावस्था को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकते हैं।

लीड बैंक, नई टिहरी और पेंशन फंड निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण के बैनर तले इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला का नाम “बीज एनपीएस का, फसल पेंशन की” रखा गया था। इस कार्यशाला में कई किसान और युवा उद्यमियों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले किसानों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के बारे में पूरी जानकारी दी गई। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के सहायक प्रबंधक सचिन राठी ने बताया कि एनपीएस महज एक निवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक वो जरिया है, जिससे कोई भी किसान खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर कर सकता है। यही नहीं, सिर्फ 250 रुपये निवेश करके किसान भाई अपने वृद्धावस्था को आर्थिक रूप से सुरक्षित रख सकता है और अगर वो लंबे समय तक ऐसा करने में सफल रहा, तो उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो।

इस कार्यशाला में खंड विकास अधिकारी चम्बा शाकिर हुसैन, पीएफआरडीए के सहायक प्रबंधक शुभम खंडेलवाल, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के सहायक महाप्रबंधक दीपक ममगाईं, मुख्य प्रबंधक राजीव कुमार सिंह, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ए. एन. शुक्ला, नई टिहरी के जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक मनीष मिश्रा सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

वहीं, कार्यशाला में शिरकत करने वाले मुख्य विकास अधिकारी, टिहरी गढ़वाल वरुणा अग्रवाल एवं अन्य विशेषज्ञों ने किसानों को एनपीएस के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के माध्यम से जुड़कर किसान, मजदूर और असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोग खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित रख सकते हैं। इससे उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। इससे किसान भाइयों को वृद्धावस्था में आय का एक नियमित साधन मिल जाएगा और उन्हें अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए किसी दूसरे पर आश्रित नहीं होना होगा।

उधर, वित्तीय विशेषज्ञों ने कहा कि आज की तारीख में महज खेती किसानी से होने वाले आय पर आश्रित रहने से अपनी आर्थिक जरूरतों की पूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी स्थिति में हर किसान भाई के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो अपनी वृद्धावस्था को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए अभी से ही थोड़ा थोड़ा करके निवेश करके इससे उन्हें आगामी दिनों में व्यापक स्तर पर फायदा पहुंचेगा।

इसके अलावा, एफपीओ सदस्यों ने भी कार्यशाला में हिस्सा लेने के बाद अपने अनुभव साझा किए और इस तरह के कदम को अपनी आर्थिक जीवन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी बताया।

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