N1Live Punjab ABVP की जीत पर AAP/ASAP का बड़ा सवाल: विवादित दस्तावेज़ों और चुनावी पात्रता पर हाईकोर्ट जाएगी टीम, PU प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल
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ABVP की जीत पर AAP/ASAP का बड़ा सवाल: विवादित दस्तावेज़ों और चुनावी पात्रता पर हाईकोर्ट जाएगी टीम, PU प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल

AAP/ASAP raises major questions over ABVP's victory: Team to move High Court regarding controversial documents and electoral eligibility; questions also raised over PU administration's silence.

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 31 अगस्त | पंजाब यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव के बाद जहां ABVP उम्मीदवार अंकित बिधान की जीत की खबर सामने आ रही है, वहीं आम आदमी पार्टी से जुड़ी छात्र टीम ASAP ने इस पूरे चुनाव और विशेष रूप से ABVP उम्मीदवार की चुनावी पात्रता को हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है।

ASAP का कहना है कि चुनाव से पहले ही उसने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को उम्मीदवार की पात्रता, उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, कथित Unfair Means (UMC) मामले, चुनाव लड़ने की योग्यता और दस्तावेज़ों से जुड़े गंभीर सवालों से लिखित/औपचारिक रूप से अवगत कराया था। प्रशासन की ओर से मामले पर संज्ञान लेने का भरोसा भी दिया गया, लेकिन चुनाव संपन्न होने तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

ASAP के अनुसार, अब इस पूरे मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा और यह सवाल उठाया जाएगा कि जब किसी उम्मीदवार की चुनाव लड़ने की पात्रता पर गंभीर आपत्तियां पहले से विश्वविद्यालय के संज्ञान में थीं, तो उन पर निर्णय लिए बिना उसे चुनाव लड़ने की अनुमति किस आधार पर दी गई।

“जिस उम्मीदवारी पर चुनाव से पहले सवाल उठे, उसके परिणाम को बिना जांच के कैसे वैध माना जा सकता है?”

ASAP का आरोप है कि अंकित बिधान के शैक्षणिक एवं अनुशासनात्मक रिकॉर्ड को लेकर गंभीर तथ्य हैं, जिनका उल्लेख चुनावी प्रक्रिया में किया जाना आवश्यक था। टीम के मुताबिक, बिधान पंजाब यूनिवर्सिटी में LL.B. की पढ़ाई के दौरान कई परीक्षाओं में असफल रहा और उसके खिलाफ Unfair Means का मामला भी सामने आया, जिसके चलते उसे वर्ष 2023 से 2025 तक विश्वविद्यालय से debar किया गया था।

ASAP का यह भी कहना है कि इसके बावजूद बाद में गुजरात की Sabarmati University से प्राप्त MA डिग्री के आधार पर पंजाब यूनिवर्सिटी में PhD में प्रवेश लिया गया। इसी प्रवेश की पात्रता और संबंधित दस्तावेज़ों की वैधता को लेकर भी टीम ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ASAP का दावा है कि उम्मीदवार की शैक्षणिक पात्रता और दस्तावेज़ों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक थी, लेकिन इन सवालों के बावजूद उसे चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई।

Lingdoh Committee के नियमों का भी हवाला ASAP ने छात्र चुनावों के लिए लागू Lyngdoh Committee recommendations का हवाला देते हुए कहा है कि चुनावी पात्रता के संबंध में विश्वविद्यालय को उम्मीदवार के अनुशासनात्मक और अकादमिक रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए थी।

टीम का कहना है कि यदि किसी छात्र को अनुशासनात्मक कारणों से विश्वविद्यालय से debar किया गया हो या उसके academic/disciplinary मामलों को लेकर गंभीर स्थिति हो, तो उसकी चुनावी पात्रता की जांच महज औपचारिकता नहीं हो सकती। “हमारा सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से है। अगर नियम सभी छात्रों के लिए समान हैं, तो वे किसी राजनीतिक संगठन के उम्मीदवार के लिए अलग कैसे हो सकते हैं?” — ASAP

चुनाव से पहले प्रशासन को बताया, फिर भी चुनाव करा दिया गया: अब कोर्ट में जवाब मांगेगी टीम ASAP ने कहा कि सबसे गंभीर प्रश्न पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका को लेकर है। टीम ने दावा किया कि चुनाव से पहले ही प्रशासन को इन सभी आपत्तियों और दस्तावेज़ों से संबंधित सवालों की जानकारी दे दी गई थी और प्रशासन ने मामले को देखने की बात कही थी।

इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी और मतदान संपन्न हो गया। ASAP का कहना है कि अब प्रशासनिक स्तर पर जवाब नहीं, बल्कि न्यायिक स्तर पर जवाब मांगा जाएगा।

टीम जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर यह मांग रखेगी कि उम्मीदवार की चुनावी पात्रता, उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों और उसके कथित disciplinary record की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि चुनावी नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो चुनाव परिणाम की वैधता पर भी उचित कानूनी निर्णय लिया जाए।

“जीत का जश्न बाद में, पहले दस्तावेज़ और पात्रता की जांच हो” ASAP ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष किसी छात्र संगठन की जीत या हार तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में नियम सभी पर बराबर लागू होंगे या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर कुछ उम्मीदवारों को अलग मानदंड दिए जाएंगे।

ASAP ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार की पात्रता पर चुनाव से पहले ही गंभीर सवाल विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रख दिए गए थे, तो उनका निपटारा किए बिना चुनाव करवाना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। “अगर दस्तावेज़ सही हैं तो जांच से डरने की जरूरत नहीं है। अगर पात्रता सही है तो कोर्ट में भी वह साबित हो जाएगी। लेकिन जांच से पहले ही जीत को अंतिम सत्य मान लेना स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

ASAP ने कहा कि वह इस मामले को पूरी मजबूती के साथ कानूनी मंच पर ले जाएगी और विश्वविद्यालय चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों के समान अनुपालन की लड़ाई जारी रखेगी। “जिस मुद्दे को चुनाव से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को देखना चाहिए था, अब वही मुद्दा अदालत के सामने जाएगा। चुनाव खत्म हुआ है, सवाल खत्म नहीं हुए।”

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