जसवान-प्रागपुर के विधायक बिक्रम ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश में ग्राम पंचायतों के विकास के लिए 3,744 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। उन्होंने 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में राज्य की पंचायती राज संस्थाओं को जारी होने वाले इस अनुदान के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस आवंटन से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों को काफी बढ़ावा मिलेगा।
ठाकुर ने कहा कि यह आवंटन 15वें वित्त आयोग के तहत दिए जाने वाले अनुदान से लगभग 1,644 करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने आगे कहा कि औसतन, एक ग्राम पंचायत को पांच साल की अवधि में लगभग 1 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि यह धनराशि पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, सड़कों, नालियों और जल निकासी व्यवस्था सहित बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ सामुदायिक भवनों और पंचायत कार्यालयों की मरम्मत और रखरखाव के लिए है। उन्होंने आगे बताया कि अनुदान को समान रूप से बद्ध और गैर-बद्ध घटकों में विभाजित किया गया है। बद्ध अनुदान का उपयोग विशिष्ट प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए किया जाएगा, जबकि गैर-बद्ध घटक पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्य करने की सुविधा प्रदान करेगा।
भाजपा विधायक ने कहा कि 16वें वित्त आयोग के आवंटन से पंचायत समितियों और जिला परिषदों को भी बजटीय सहायता मिलेगी, जिससे राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था मजबूत होगी।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बुनियादी विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को धनराशि उपलब्ध कराने हेतु अपनी ओर से कोई नई योजना शुरू करने में विफल रही है। उन्होंने कांग्रेस सरकार को चुनौती दी कि वह ग्राम पंचायतों के विकास के लिए शुरू की गई किसी भी योजना का विवरण सार्वजनिक करे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार से अपर्याप्त वित्तीय सहायता के कारण राज्य में विकास कार्य बाधित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पंचायती राज संस्थाएं काफी हद तक केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त निधियों पर निर्भर हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह 16वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत निधियों का उचित और समय पर उपयोग सुनिश्चित करे और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को प्राथमिकता दे ताकि 16वें वित्त आयोग के तहत उच्च निधि आवंटन का मूल उद्देश्य प्राप्त किया जा सके।

