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अदाणी पोर्ट्स ने भारत का पहला पोर्ट ऑफ रिफ्यूज शुरू किया, समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

Adani Ports opens India's first Port of Refuge, boosting maritime security

27 मार्च । अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने शुक्रवार को कहा कि उसने भारत के पहले पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (पीओआर) को चालू कर दिया है, जिससे समुद्री इमरजेंसी इन्फ्रास्ट्रक्चर में लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर हो गई है और समुद्री आपात स्थितियों और संकट में फंसे जहाजों से निपटने के लिए एक मजबूत सिस्टम का निर्माण हुआ है।

इस पहल को एसएमआईटी साल्वेज, रॉयल बोस्कालिस वेस्टमिंस्टर एनवी (बोस्कालिस) के बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रभाग और समुद्री आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र (एमईआरसी) के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) का समर्थन प्राप्त है, जो वैश्विक विशेषज्ञता और समन्वित प्रतिक्रिया क्षमता प्रदान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा परिभाषित पीओआर एक ऐसा स्थान है जहां जहाज संकट की स्थिति में स्थिर होने, जीवन बचाने और पर्यावरणीय क्षति को सीमित करने के लिए आश्रय ले सकते हैं।

हालांकि इस तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रमुख समुद्री अर्थव्यवस्थाओं में मानक हैं, भारत ने अब तक ऐसी कोई संरचना औपचारिक रूप से नहीं बनाई थी।

भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती एकीकृत परिवहन कंपनी, एपीएसईजेड (जो भारत के बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत संभालती है) ने कहा कि यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और प्रमुख वैश्विक शिपिंग मार्गों पर स्थित भारत अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।

एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), अश्वनी गुप्ता ने कहा, “यह उपलब्धि भारत के समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

गुप्ता ने कहा, “बंदरगाह अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते हैं, लेकिन पीओआर जीवन की रक्षा करते हैं। समर्पित पीओआर स्थापित करके, हम भारत की समुद्री तैयारियों को अपग्रेड कर रहे हैं और विश्व स्तरीय तटीय सुरक्षा के लिए एक नया मानदंड स्थापित कर रहे हैं। एपीएसईजेड में, हमारा मानना ​​है कि विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्राक्चर के साथ-साथ विश्व स्तरीय जिम्मेदारी भी होनी चाहिए।”

एपीएसईजेड दो स्थलों को पीओआर के रूप में नामित करेगा। इसमें पश्चिमी तट पर स्थित दिघी बंदरगाह, जो अरब सागर और फारस की खाड़ी की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात को सुगम बनाएगा, और पूर्वी तट पर स्थित गोपालपुर बंदरगाह, जो बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्गों पर जहाजों को सेवाएं प्रदान करेगा। मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार गलियारों में से एक है।

ये सुविधाएं विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया टीमों के माध्यम से बचाव और जहाजों के मलबे को हटाने, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन समन्वय सेवाएं प्रदान करेंगी।

शिपिंग के डायरेक्टर जनरल श्याम जगन्नाथन ने कहा,“यह पहल भारत की समुद्री तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मानकीकृत पोर्ट ऑफ रिफ्यूज फ्रेमवर्क को अपनाने से समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान अधिक समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई संभव हो सकेगी, जिससे जीवन, माल और तटीय पर्यावरण की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”

यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलनों के अनुरूप है, जो सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शिपिंग कॉरिडोर में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

एसएमआईटी साल्वेज (बोस्कालिस) के प्रबंध निदेशक (एमडी) रिचर्ड जानसेन ने कहा,“किसी दुर्घटनाग्रस्त जहाज को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज उपलब्ध कराना बचाव अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि जहाज और उसके माल को शीघ्रता और पेशेवर तरीके से संभाला जा सके और प्रभावित माल और अग्निशमन जल का उपचार और निपटान लागू कानून के अनुसार किया जा सके।”

उन्होंने आगे कहा कि एसएमआईटी साल्वेज भारत के प्रमुख शिपिंग मार्गों पर त्वरित, सुरक्षित और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ बचाव क्षमता और अनुभव प्रदान करने में प्रसन्न है।

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