N1Live Entertainment ऊंट पर कूदने के बाद जितेंद्र को मिली थी करियर की पहली फिल्म, लेकिन तनख्वाह में हो गई भारी कटौती
Entertainment

ऊंट पर कूदने के बाद जितेंद्र को मिली थी करियर की पहली फिल्म, लेकिन तनख्वाह में हो गई भारी कटौती

After jumping on a camel, the resort got its first film of savagery, but the salary became heavy rocks.

7 अप्रैल । हिंदी सिनेमा में पहचान बनाने के लिए सभी को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। किसी भी नए अभिनेता को पहली फिल्म मिलना किस्मत के चमक जाने के जैसा होता है, लेकिन जितेंद्र के लिए यह घाटे का सौदा रहा था।

150 रुपए से फिल्मों में कदम रखने वाले जितेंद्र ने कभी नहीं सोचा था कि वे फिल्मों में काम करेंगे, लेकिन पैसे कमाने और पहचान बनाने की चाह में अभिनेता ने बॉडी डबल के साथ हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म पाने के लिए जितेंद्र ने कितने पापड़ बेले थे?

7 अप्रैल 1942 को जन्मे जितेंद्र के पिता की नकली ज्वेलरी की दुकान थी, जो फिल्मों के सेट पर भी अपने नकली गहने बेचा करते थे। जितेंद्र भी अपने पिता के काम में हाथ बांटते थे। वे बचपन से ही फिल्मों के शौकीन थे लेकिन नहीं पता था कि गहने बेचने का काम ही हिंदी सिनेमा में कदम रखने का पहला रास्ता है। अभिनेता के करियर की शुरुआत भले ही ‘गीत गाया पत्थरों ने’ से हुई थी लेकिन उससे पहले वो फिल्म ‘सेहरा’ पर काम कर चुके थे और इसी फिल्म में अभिनेता की बहादुरी और लगन देखने के बाद निर्देशक वी. शांताराम ने जितेंद्र को पहली बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म ऑफर की थी।

बहुत कम लोग जानते हैं कि जितेंद्र ने फिल्म ‘सेहरा’ के सेट पर हर तरीके का काम किया था। वे आर्टिस्ट का सारा काम करते थे और उनकी जरूरतों का ध्यान भी रखते थे। उस वक्त एक महीने की तनख्वाह 150 रुपए थी। इसी फिल्म के दौरान अभिनेता ने वी. शांताराम को प्रभावित करने के लिए चापलूसी की सारी हदें पार कर दी थीं। खुद अभिनेता ने स्वीकारा था कि निर्देशक को इम्प्रेंस करने के लिए वो सेट पर चापलूसी करने से भी पीछे नहीं हटते थे।

उन्होंने बताया कि एक बार फिल्म में अभिनेत्री संध्या को एक सीन करना था, जिसमें ऊंट पर कूदना था। निर्देशक ऐसे शख्स की तलाश में थे, जो यह सीन कर सके और बिल्कुल संध्या जैसा दिखे। वी. शांताराम को इम्प्रेस करने के लिए अभिनेता ने सीन को करने के लिए हां कर दिया और ऊंट पर छलांग लगा दी। वो सीन सिर्फ पैसे के लिए नहीं किया था, बल्कि खुद को साबित करने के लिए किया था, जिसके बाद निर्देशक ने फिल्म ‘गीत गाया पत्थरों ने’ में लीड रोल दिया और तनख्वाह थी 100 रुपए।

अभिनेता ने बताया कि इस वक्त पैसे से फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि जितेंद्र को जितेंद्र बनाने वाले वी. शांताराम थे और उनकी की बदौलत सिनेमा में कदम रखा था।

Exit mobile version