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अहमदाबाद: विस्फोट वाली अवैध पटाखा फैक्ट्री को किया ध्वस्त, हुई थी 9 लोगों की मौत

Ahmedabad: Illegal firecracker factory where explosion occurred—killing 9 people—demolished.

अहमदाबाद में जिस पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने से नौ लोगों की मौत हुई थी, वहां अवैध रूप से निर्मित ढांचों को प्रशासन ने रविवार को ध्वस्त कर दिया। वहीं, पुलिस ने शहरभर में बिना अनुमति संचालित पटाखा निर्माण इकाइयों के खिलाफ भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

गुजरात पुलिस ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह कार्रवाई शनिवार को हुए विस्फोट वाली जगह पर की गई। यह स्थान रामोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वस्त्राल गांव में है। बयान में कहा गया, “यह कार्रवाई अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलौत, संयुक्त पुलिस आयुक्त (सेक्टर-2) जयपाल सिंह राठौड़ और पुलिस उपायुक्त (जोन-8) मयूर पाटिल के मार्गदर्शन में की गई।”

पुलिस ने बताया कि घटना स्थल पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनी रूप से तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही अन्य अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्रियों के खिलाफ भी जांच और कार्रवाई जारी है। यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) कैंप के पीछे रामोल-गात्राड रोड स्थित ‘न्यू गुजरात फायर वर्क्स’ इकाई में हुए विस्फोट के बाद शुरू किए गए अभियान का हिस्सा है।

इस विस्फोट में नौ मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद पुलिस, आरएएफ जवानों और अहमदाबाद फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की टीम ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया था।

पुलिस का आरोप है कि फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी। उसका लाइसेंस समाप्त हो चुका था और उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, गणेश उत्सव के लिए मिले ऑर्डर पूरे करने के लिए फैक्ट्री ने हाल ही में दोबारा पटाखों का निर्माण शुरू किया था। इस मामले में रामोल थाने में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने फैक्ट्री संचालक रमिला डोडिया, उसके बेटे मेहुल डोडिया के अलावा सादिक सैयद नाम के शख्स को भी गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां फैक्ट्री के संचालन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। इसमें विस्फोटक सामग्री के स्रोत और सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है। इससे पहले शहर के पुलिस आयुक्त ने पुलिस उपायुक्त मयूर पाटिल की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था। इसमें सहायक पुलिस आयुक्त वाईए गोहिल और रामोल पुलिस निरीक्षक वीडी मोरी को सदस्य बनाया गया है।

तीन सदस्यीय एसआईटी को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, विस्फोटक विशेषज्ञों, अग्निशमन विभाग, श्रम विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर विस्तृत जांच करने और 10 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियान का हिस्सा है।

विस्फोट के बाद से पुलिस, अहमदाबाद नगर निगम और फायर विभाग शहर के बाहरी इलाकों में लगातार जांच अभियान चला रहे हैं। इस दौरान बिना अनुमति चल रही इकाइयों की पहचान कर उन्हें सील किया जा रहा है। वहीं, शहर के हाल के सबसे घातक औद्योगिक हादसों में से एक की जांच भी जारी है।

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