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विल्लुपुरम में गुटबाजी पर एआईएडीएमके की सख्ती, 11 पदाधिकारियों को संगठनात्मक पदों से हटाया

AIADMK cracks down on factionalism in Villupuram; removes 11 office-bearers from organizational posts.

16 जुलाई । तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) नेतृत्व ने विल्लुपुरम जिले में गुटबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए 11 पदाधिकारियों को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया है। यह कार्रवाई 9 जुलाई को पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद की गई है।

बताया जा रहा है कि पार्टी महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने जिला इकाई में अनुशासन बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, 9 जुलाई को आयोजित कार्यकर्ता बैठक के दौरान वरिष्ठ नेता सी. वे. शन्मुगम और हाल ही में नियुक्त विल्लुपुरम जिला सचिव पसुपति के समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।

आरोप है कि दोनों गुटों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। इस दौरान एक वाहन पर भी पत्थर फेंके गए और कुछ कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। घटना के बाद पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा।

घटना की समीक्षा के बाद पार्टी नेतृत्व ने सी. वे. शन्मुगम समर्थक माने जाने वाले 11 पदाधिकारियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटा दिया। इस कार्रवाई को जिला इकाई में अनुशासन बहाल करने और गुटबाजी पर रोक लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, विल्लुपुरम में दोनों गुटों के बीच विवाद विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार बना हुआ है। चुनाव में एआईएडीएमके के तीसरे स्थान पर खिसकने के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद उभर आए थे।

हालांकि, पार्टी ने एडप्पडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन राज्य के कई हिस्सों की तरह विल्लुपुरम में भी गुटबाजी खत्म नहीं हो सकी।

बताया जाता है कि पशुपति को जिला सचिव बनाए जाने के बाद उनके समर्थकों और सी. वे. शन्मुगम खेमे के बीच तनाव और बढ़ गया था। 9 जुलाई की घटना को हाल के महीनों में जिला इकाई के भीतर सबसे गंभीर आंतरिक विवादों में से एक माना जा रहा है।

पार्टी नेतृत्व ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन की कार्यप्रणाली को बाधित करने या पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल एआईएडीएमके ने यह नहीं बताया है कि इस मामले में आगे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी या नहीं। वहीं, सी. वे. शन्मुगम ने अब तक 11 पदाधिकारियों को हटाए जाने या पार्टी नेतृत्व की कार्रवाई पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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