जालंधर के महल गांव स्थित गुरुद्वारा साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र अंशों को फाड़कर किए गए अपमान का कड़ा संज्ञान लेते हुए अकाल तख्त ने बुधवार को घटना की जांच के आदेश दिए। एसजीपीसी ने अपने सदस्य रणजीत सिंह कहलों के नेतृत्व में एक टीम को घटना की जांच के लिए भेजा है। अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा, “गुरु ग्रंथ साहिब हमारे जगत ज्योत गुरु (जीवित रूप में गुरु) हैं, इसलिए उनके सम्मान के साथ किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।”
गर्गज ने जालंधर के ही रहने वाले एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नान और इलाके के अन्य सदस्यों से बात की और उनसे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने को कहा।
जत्थेदार गर्गज ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब के प्रमुख ग्रंथी ज्ञानी जोगिंदर सिंह को आज ही तख्त से एक टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचने और गुरुद्वारे में सुरक्षा व्यवस्था और अपवित्रता की घटना के संबंध में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचेंगे और स्थिति की समीक्षा करेंगे।
गरगज ने पंजाब सरकार से इस बेअदबी के पीछे साजिशकर्ताओं और मुख्य दोषियों की पहचान उजागर करने और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आह्वान किया।
साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गुरुद्वारों के कर्मचारियों को परिसर में हर समय सुरक्षा बनाए रखने और व्यवस्था को मजबूत रखने की अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर अभी भी सुरक्षा में ढिलाई की खबरें आ रही हैं, जिससे पता चलता है कि प्रशासक गुरु साहब की सुरक्षा से ज्यादा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने सिख समुदाय से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके संबंधित क्षेत्रों के गुरुद्वारों में हर समय सुरक्षा बनी रहे और कैमरे चालू स्थिति में हों। उन्होंने कहा कि शरारती तत्वों ने जालंधर स्थित सिख तीर्थस्थल पर गुरु साहिब के पवित्र अंगों को एक बच्चे से अपवित्र करवाकर सिखों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है।
उन्होंने कहा कि प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित गुरुद्वारे में सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक नहीं थी। एसजीपीसी प्रमुख धामी का आरोप है कि मान सरकार ढिलाई बरत रही है।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने आरोप लगाया कि इस घटना ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली भगवंत मान सरकार द्वारा किए गए सुरक्षा इंतजामों की खामियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अतीत में सिख धर्मग्रंथों और प्रतीकों के अपमान में शामिल दोषियों के खिलाफ सरकार ने कभी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की, जिससे अनैतिक तत्वों को अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने का प्रोत्साहन मिला।


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