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दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अलका लांबा का बयान दर्ज, 27 अप्रैल को अगली सुनवाई

Alka Lamba's statement recorded in Delhi's Rouse Avenue Court, next hearing on April 27

18 अप्रैल । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर जुलाई 2023 में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में अब 27 अप्रैल को सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही है, जहां शुक्रवार को आरोपी और महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा का बयान दर्ज किया गया।

दरअसल, जुलाई 2023 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला इकाई ने अलका लांबा के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने का आरोप है, जिसके बाद यह मामला दर्ज किया गया।

इससे पहले हुई सुनवाई में अदालत ने अलका लांबा के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए थे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मामला बनता है और ट्रायल चलाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अलका लांबा पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने, उनके कार्य में बाधा डालने, कानूनी आदेश की अवहेलना करने और सार्वजनिक रास्ता अवरुद्ध करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इन आरोपों के तहत उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 221, 223(ए) और 285 के तहत मुकदमा चल रहा है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की गई है। ऐसे में अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि अगली सुनवाई में अदालत क्या फैसला लेगी।

बता दें कि यह मामला 2024 लोकसभा चुनाव से पहले जंतर-मंतर पर किए गए एक प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें अलका लांबा और उनके समर्थकों ने महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर विरोध जताया था। इसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान उन पर कई आरोप लगे थे। जानकारी के अनुसार, अलका लांबा पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने, उनके काम में बाधा डालने, कानूनी आदेश की अवहेलना करने और सार्वजनिक रास्ता रोकने जैसे आरोप हैं। इन आरोपों के लिए अब उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 221, 223(ए) और 285 के तहत मुकदमा चलेगा।

पिछली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि कांग्रेस नेता अलका लांबा ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया, पुलिस की ड्यूटी में बाधा डाली और सड़क जाम कराया। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और किसी भी पुलिसकर्मी को चोट लगने का कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आरोप तय किए।

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