N1Live Entertainment पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता को मिले प्यार से गदगद हुए अमिताभ बच्चन, शेयर की नई कविता
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पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता को मिले प्यार से गदगद हुए अमिताभ बच्चन, शेयर की नई कविता

Amitabh Bachchan was overwhelmed by the love received for his father Harivansh Rai Bachchan's poem and shared a new poem.

9 फरवरी । सदी के महानायक हर रविवार को फैंस से मिलने की परंपरा को 40 साल से निभा रहे हैं और इस परंपरा की शुरुआत फिल्म ‘कुली’ के सेट पर चोटिल होने के बाद की थी।

फैंस भारी संख्या में अभिनेता से मिलने पहुंचे थे। आज भी अभिनेता परंपरा को निभा रहे हैं, लेकिन बीते रविवार को फैंस का प्यार देखकर अभिनेता खुशी से गदगद हो गए हैं और उन्होंने फैंस का दिल से धन्यवाद देते हुए अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता साथ शेयर की है।

अमिताभ बच्चन अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ न कुछ शेयर करते हैं, और अब उन्होंने दर्शकों के लिए एक थैंक्यू नोट पोस्ट किया है और पिता द्वारा लिखी गई कविता पर प्यार लुटाने के लिए धन्यवाद कहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कल के फेसबुक पर, आप सबके उत्तर पढ़कर हृदय भावुक हो उठा, बहुत-बहुत आभार। आपके कुछ विचारों ने पूज्य बाबूजी की एक और बहुत ही महत्वपूर्ण कविता की याद दिला दी। कविता लंबी है, लेकिन आप सबके भावों को पढ़कर, उस कविता के कुछ शब्द यहाँ लिख रहा हूं।”

उन्होंने आगे लिखा, “कविता का शीर्षक है, ‘क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी क्या करूं।’ ‘कौन है जो दूसरों को दुख अपना दे सकेगा, कौन है जो दूसरों से दुख उसका ले सकेगा, उस नयन से बह सकी कब इस नयन की अश्रु धारा, तुम दुखी हो तो सुखी मैं, विश्व का अभिशाप भारी… क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी क्या करूं।’ कभी अवसर मिला तो इस कविता को लिखने के पीछे की कहानी को आपसे बताऊंगा, जिसने बाबूजी को प्रेरित किया।”

दरअसल बीते रविवार को फैन मीट के बाद अभिनेता ने फोटो पोस्ट कर पिता की कविता की पंक्ति लिखी थी, जिस पर फैंस का जबरदस्त रिस्पांस देखने को मिला था। फैंस का कहना था कि वे अमिताभ बच्चन ही हैं, जिसे दोबारा मिट्टी भी नहीं बना सकती है। कई यूजर्स ने कविता की पंक्तियों को खुद की जिंदगी से कनेक्ट कर भी भावनाएं व्यक्त की थीं।

पंक्ति में लिखा था, “वो किसे दोषी ठहराये, और किसको दुख सुनाये, जबकि मिट्टी साथ मिट्टी के करे अन्याय, तुम तूफान समझ पाओगे।” बता दें कि हरिवंश राय बच्चन ने कई एकाकी कविताएँ लिखी थीं, जिनकी पंक्तियों ने विश्व प्रसिद्धि प्राप्त की थी। इन एकाकी कविताओं में ‘अब मत मेरा निर्माण करो’, ‘मूल्य दे सुख के क्षणों का’, ‘कोई गाता ‘मैं सो जाता”, ‘मेरा तन भूखा, मन भूखा’, और ‘खिड़की से झाँक रहे तारे’ शामिल हैं।

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