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सबूत से छेड़छाड़ मामले में एंटनी राजू को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, सजा रहेगी बरकरार

Antony Raju did not get relief from the Supreme Court in the evidence tampering case, the sentence will remain intact.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल के पूर्व मंत्री एंटनी राजू की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 1990 के सबूत से छेड़छाड़ के एक चर्चित मामले में अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनकी सजा पर रोक लगाने से मना किया गया था। इस फैसले के बाद ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई और अपीलीय अदालत से बरकरार सजा प्रभावी बनी रहेगी।

पूर्व परिवहन मंत्री एंटनी राजू सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) में शामिल पार्टी जनाधिपत्य केरल कांग्रेस के एकमात्र विधायक थे। जनवरी 2026 से वह विधायक नहीं रह गए हैं। उन्हें नेदुमंगड ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी। यह मामला 1990 का है, जब ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एंड्रयू साल्वाटोर सेर्वेली को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर 61.5 ग्राम नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसे उसने अंर्तवस्त्र में छिपाया था।

उस समय युवा वकील एंटनी राजू ने सर्वेली का केस लड़ा था। निचली अदालत ने सर्वेली को दोषी ठहराया था, वहीं बाद में केरल उच्च न्यायालय ने सर्वेली को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि सबूत के तौर पर पेश किया गया अंर्तवस्त्र बहुत छोटा था, जिससे अभियोजन पक्ष के मामले पर गंभीर संदेह पैदा हो गया।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई बाद की जांचों में यह आरोप सामने आए कि अदालत की हिरासत के दौरान भौतिक सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। आखिरकार 1994 में राजू और एक अदालत के क्लर्क के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद लंबी जांच के बाद 2006 में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें तकनीकी आधार पर आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने अभियोजन को फिर से शुरू करने का निर्देश दिया था और कहा कि मुकदमा एक साल के भीतर पूरा किया जाए।

राजू को आपराधिक साजिश, सबूतों को नष्ट करने, झूठे सबूत गढ़ने और संबंधित अन्य अपराधों के आरोपों में दोषी ठहराया गया। हालांकि सत्र न्यायालय ने सजा पर फिलहाल रोक लगाई थी, लेकिन दोषसिद्धि को बरकरार रखा था।

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