February 23, 2026
Entertainment

अनुपम खेर ने सूरज बड़जात्या को बताया ‘नेशनल ट्रेजर’ , कहा- ‘आपके सिनेमा में बसता है भारत’

Anupam Kher calls Sooraj Barjatya a ‘national treasure’, says ‘India lives in your cinema’

23 फरवरी । भारतीय सिनेमा में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो सिर्फ काम तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ गहरी दोस्ती में बदल जाते हैं। ऐसा ही एक रिश्ता है दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर और मशहूर फिल्ममेकर सूरज बड़जात्या का। रविवार को सूरज बड़जात्या के जन्मदिन के मौके पर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने सूरज बड़जात्या को नेशनल ट्रेजर कहा और जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।

अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, ”जन्मदिन मुबारक हो सूरज बड़जात्या… आप सादे अंदाज में भारतीय सिनेमा की एक अनमोल धरोहर हैं। आज के दौर में, जब सिनेमा तेजी से बदल रहा है, तब भी सूरज बड़जात्या ऐसी फिल्में चुनते हैं, जिनमें रिश्तों की अहमियत, पारिवारिक मूल्य, विश्वास और अच्छाई की झलक मिलती है। बहुत कम लोग आज ऐसे विषयों पर फिल्में बनाने की हिम्मत करते हैं, लेकिन उन्होंने बिना किसी दिखावे के लगातार यही रास्ता अपनाया हुआ है। आपके सिनेमा में भारत बसता है।”

अपने पोस्ट में अनुपम खेर ने उनके साथ के लंबे सफर को भी याद किया। उन्होंने कहा, ”मेरा और सूरज का रिश्ता 1984 की फिल्म ‘सारांश’ से शुरू हुआ था। उस समय से लेकर आज तक मैंने सूरज बड़जात्या के सफर को बहुत करीब से देखा है। यह सफर बहुत स्थिर, सधा हुआ और अपने मूल विश्वासों पर टिका हुआ रहा है। उनको जानना मतलब दयालुता, करुणा, ईमानदारी और सच्ची खुशी को जानना है।”

अनुपम खेर ने कहा, ”सूरज बड़जात्या की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है। न उनके काम में शोर होता है और न ही उनके व्यवहार में कोई बनावट। वह बिना किसी प्रचार और दिखावे के अपने काम पर भरोसा करते हैं और उसी भरोसे के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। यही वजह है कि उनकी फिल्में सीधे दिल से जुड़ती हैं और हर उम्र के दर्शकों को अपनी सी लगती हैं।”

इस पोस्ट में अनुपम खेर ने एक वीडियो भी साझा की, जिसमें वह सूरज बड़जात्या की शर्ट पर भारत का एक छोटा सा सुनहरा प्रतीक लगाते नजर आते हैं।

इस पर अनुपम खेर ने आगे लिखा, ”यह मेरा प्रतीकात्मक तरीका है, यह कहने का कि सूरज बड़जात्या अपने सिनेमा और अपने दिल में भारत को बसाए हुए हैं। वह जो कहानियां सुनाते हैं, जो भावनाएं सहेजते हैं और जिन मूल्यों का जश्न मनाते हैं, वही भारत की असली आत्मा को दर्शाते हैं।”

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